चंदौली: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत यूपी के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहां शनिवार को दूसरे दिन वह चंदौली पहुंचे. चंदौली में जस्टिस सूर्यकांत ने 15 सौ करोड़ की परियोजना एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास किया. इस दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया. आयोजन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रम नाथ पंकज मित्तल, मनोज मिश्रा, राजेश बिंदल के साथ हाई कोर्ट इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी भी पहुंचे.
सीएम योगी ने कहा कि इस कॉम्प्लेक्स में न्यायिक अधिकारियों के लिए आवश्यक सुविधाएं रहेंगी, जिसमें पार्किंग, कैंटीन उपलब्ध रहेगा. अब ऐसा नहीं होगा कि न्याय के लिए लड़ने वाले, जूझने वाले हमारे अधिवक्ता स्वयं दिन की रोशनी में खुले में बैठते थे, जहां टूटे हुए चेंबर होते थे, लेकिन अब अच्छे हाई राइस बिल्डिंग में उनके लिए भी बेहतर चेंबर की व्यवस्था होगी.
इन जनपदों में भी उपलब्ध होंगी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परिसर में हम जो सुविधा प्रदान करने जा रहे हैं, वह माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय की प्रेरणा से आज उत्तर प्रदेश के छह जनपदों में एक साथ उपलब्ध कराई जा रही है. ये जनपद हैं चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया. इसके अतिरिक्त चार अन्य जनपदों में भी इस दिशा में कार्रवाई अगले कुछ महीनों के भीतर पूर्ण कर ली जाएगी और उस कार्य को भी आगे बढ़ाया जाएगा.
सीएम ने आगे कहा कि मेरा मानना है कि यह पहल भारत के न्यायिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित होने वाला एक नया अध्याय सिद्ध होगी. इसकी शुरुआत आज उत्तर प्रदेश में हमारे आदरणीय मुख्य न्यायाधीश महोदय के कार्यक्रमों के माध्यम से होने जा रही है. हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए एक मजबूत न्यायपालिका अत्यंत आवश्यक है. आम जन को जितनी सहजता और सरलता से न्याय प्राप्त होगा, उतना ही आवश्यक है कि न्यायपालिका के पास बेहतर और आधुनिक अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) भी उपलब्ध हो.
न्यायिक सुविधाओं को करना होगी सुविधा संपन्न
उन्होंने कहा कि मैं यह बताते हुए प्रसन्नता महसूस कर रहा हूं कि उत्तर प्रदेश सरकार के पास जब भी न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कार्य आते हैं, उन्हें पूरा करने में किसी प्रकार की देरी नहीं होती. हमारे पास इन कार्यों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है, क्योंकि यदि हमें सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करना है, तो न्यायिक सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ व सुविधा संपन्न बनाना अनिवार्य है. इस दिशा में अपना पूरा योगदान देने में सरकार कोई कोताही नहीं बरतती.
इन जिलों में भी बनेगा इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मुझे यह कहते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि उत्तर प्रदेश इस दिशा में बहुत ही सराहनीय प्रगति कर चुका है. आज के इस शिलान्यास कार्यक्रम के अवसर पर इन छह जनपदों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी, जैसे प्रयागराज और वाराणसी में इस प्रकार के इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की योजना है. इस संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ जी ने भी वाराणसी का विशेष उल्लेख किया है.
धन नहीं, इच्छाशक्ति की कमी
यूपी में कानून व्यवस्था मजबूत करने को लेकर सीएम ने कहा कि हमारी यह इच्छा है कि प्रत्येक जनपद में इस प्रकार के आधुनिक न्यायिक परिसर हों. वर्तमान में ये छह जनपद पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुने गए हैं. मैं प्रदेश सरकार की ओर से यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि धन की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल इच्छाशक्ति की है. आप पूरी निष्ठा और संकल्प के साथ कार्य करें, सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग मिलेगा.
उन्होंने कहा कि मैं इन सभी छह जनपदों के न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं, जिनके द्वारा लगातार इस आवश्यकता को उठाया गया. चंदौली जनपद में तो यहां के जनप्रतिनिधियों और अधिवक्ताओं द्वारा निरंतर आंदोलन भी किए गए. मैंने बार एसोसिएशन को लखनऊ बुलाकर उनसे कहा कि आंदोलन के बजाय शांतिपूर्वक न्यायिक कार्यों में सहयोग करें. शेष कार्यों को हम माननीय उच्च न्यायालय के साथ मिलकर शीघ्रता से आगे बढ़ाएंगे.
उत्तर प्रदेश सरकार के पास न्यायिक व्यवस्था से जुड़े हुए कोई भी कार्य जब आते हैं, उन्हें पूरा होने में देर नहीं लगती… pic.twitter.com/AqzsFVNRAO

