चंदौली में मौसम के बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी का सीधा असर गेहूं की फसल पर पड़ रहा है, खासकर उन खेतों में जहां गेहूं की बुआई देर से की गई थी. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण फसल के सूखने और दाने के ठीक से न भरने का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीण इलाकों में किसान अब अपनी फसलों को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं.
गेहूं की फसल पर दिखाई दे रहा असर
किसान राजाराम सोनकर ने बताया कि गेहूं की बुआई सामान्य तौर पर अक्टूबर और नवंबर के महीनों में शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार मौसम की परिस्थितियां अलग रही. लगातार हुई बारिश और खेतों में जमा पानी के कारण किसानों को समय पर बुआई करने का मौका नहीं मिल सका. कई किसानों ने मजबूरी में दिसंबर के बाद गेहूं बोया, जिसका असर अब फसल पर साफ दिखाई दे रहा है. उन्होंने बताया कि गेहूं की बुआई के लिए खेत की मिट्टी का भुरभुरा होना जरूरी होता है, लेकिन इस बार खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने के कारण मिट्टी तैयार ही नहीं हो पाई.
खेतों की भराई और सिंचाई हुई प्रभावित
उन्होंने आगे बताया कि सिंचाई की व्यवस्था भी इस बार अच्छी नहीं रही, धान की फसल के समय नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ा गया. लेकिन गेहूं की सिंचाई के समय पानी की कमी देखने को मिली. कई नहरों में पानी समय पर नहीं पहुंचा, जिससे खेतों की भराई और सिंचाई प्रभावित हुई. उन्होंने बताया कि नहर किनारे रहने वाले कई किसानों को मजबूरन अपने खर्चे पर पंपसेट लगाकर सिंचाई करनी पड़ी. कुछ किसानों ने पैसे देकर निजी साधनों से पानी की व्यवस्था की, लेकिन सभी किसानों के लिए ऐसा करना संभव नहीं था. जिन किसानों के पास सिंचाई के निजी साधन थे, उनकी फसल अभी बेहतर स्थिति में है, जबकि जिन खेतों में समय पर पानी नहीं पहुंच पाया वहां फसल कमजोर हो गई है.
गेहूं की बालियां रह सकती हैं खाली
अब मार्च में बढ़ते तापमान ने स्थिति और गंभीर बना दी है. तेज धूप के कारण गेहूं की बालियां ठीक से विकसित नहीं हो पा रही हैं. कई खेतों में दाना पूरी तरह भरने से पहले ही पौधे सूखने लगे हैं. उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह गर्मी बढ़ती रही तो कई जगह गेहूं की बालियां खाली रह सकती हैं.
पशुओं के चारे के रूप में होगा इस्तेमाल
राजाराम ने बताया कि जिन खेतों में दाना अच्छी तरह बन गया है, वहां कुछ हद तक फसल बच सकती है, लेकिन जहां दाना नहीं भरा है, वहां गेहूं का उत्पादन बहुत कम होगा. कई जगह बालियां इतनी कमजोर हैं कि वे सिर्फ भूसे के बराबर रह जाएंगी, जिनका इस्तेमाल केवल पशुओं के चारे के रूप में ही हो सकेगा.
फसल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में किसानों को फसल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, जहां संभव हो वहां हल्की सिंचाई करनी चाहिए, ताकि खेत में नमी बनी रहे. साथ ही फसल की नियमित निगरानी करना भी जरूरी है. बता दें कि इस बार मौसम की मार और सिंचाई की कमी के कारण गेहूं की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. यदि जल्द ही मौसम में सुधार नहीं हुआ और तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो किसानों को इस साल गेहूं के उत्पादन में भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.

