Health

can cancer curable know inspiring story of cancer survivors who have overcome the disease | पहले ब्रेस्ट कैंसर, फिर लंग्स और बोन कैंसर… जो एक नहीं 3 बार जानलेवा बीमारी से लड़ी जंग; इनसे मिलिए



वैसे तो दुनिया में ऐसी कई जानलेवा बीमारियां हैं, जिससे पीड़ित मरीज जिंदगी और मौत की जंग लड़ते रहते हैं. लेकिन जब कोई भी आम से लेकर खास व्यक्ति कैंसर बीमारी का नाम भी सुनता है, तो सहम उठता है. आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिन्होंने इस घातक बीमारी से 1 बार नहीं बल्कि 3 बार लड़ाई लड़ी. इस लेख में हम आपको दीबा सिद्दीकी से मिलवाना रहे हैं, आज वह बतौर न्यूट्रिशनिस्ट काम कर रही हैं. 
कैंसर पीड़ितों की कहानी, उन्हीं की जुबानीआज के समय में कैंसर का इलाज है लेकिन जानकारी के अभाव में अधिकतर लोग कैंसर के शुरुआती लक्षण को नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में 3 स्टेज या फिर 4 स्टेज पर कैंसर का पता चलता है. 3 स्टेज पर कैंसर के इलाज में काफी दिक्कत आ सकती है. वहीं थर्ड  या  फोर्थ स्टेज कैंसर में मरीज की उम्मीद भी टूट जाती है. इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के कैंसर सेंटर ने ‘National cancer survivors month’ (नेशनल कैंसर सर्वाइवर्स मंथ) में CanWin (केनविन) नाम से एक ग्रुप की शुरुआत की है. इस ग्रुप में कैंसर से लड़ने वाले लोग अपनी कहानी को एक दूसर के साथ शेयर करते हैं. वहीं कैंसर मरीज को इस जानलेवा बीमारी से जीतने के लिए दूसरे लोगों को प्रेरित करते हैं.
स्टूडेंट लाइफ में ही कैंसर ने तड़पायासाल 2014 की बात है, जब एक 22 साल की लड़की, जो अभी दुनिया की आबोहवा में ठीक तरह से घुल मिल भी नहीं पाई थी, उसे जानलेवा बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया. उसे भला क्या समझ रही होगी, दीबा उन दिनों मेडिकल साइंस में मास्टर डिग्री की स्टूडेंट थी. दीबा को जब ये मालूम पड़ा कि उसे ब्रेस्ट कैंसर ने शिकार बना लिया है, उससे कुछ ही समय पहले उनकी मां ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. इधर दीबा को कैंसर हुआ, तो इसके कुछ दिनों बाद उनके पिता को हार्ट अटैक आया. इसी बीच पहले दीबा की सर्जरी हुई. और फिर कीमोथेरेपी, रेडिएशन और हार्मोन थेरेपी हुई.
कीमोथेरेपी के अगले दिन दिया एग्जामजब ज़ी मीडिया ने दीबा से बात की तो उन्होंने बताया कि साल 2014 में जब उनको पहली बार कैंसर हुआ था, उस दौरान पहली कीमोथेरेपी के अगले दिन उनका कॉलेज एग्जाम था. दीबा ने कीमोथेरेपी के अगले दिन एग्जाम दिया. हालांकि उनका संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ.
नहीं खत्म हुआ कैंसर पीड़ित का संघर्षकैंसर मरीज के इलाज के बाद कैंसर का फ्लोअप बेहद जरूरी होता है. इस कैंसर पीड़ित का संघर्ष यहां खत्म नहीं हुआ है. जनवरी 2019 में उनके पिता का निधन हो गया. पिता को खोने के दुख में दीबा का फ्लोअप टाइम पर नहीं हुआ. कुछ समय बाद दीबा को फिर से ब्रेस्ट कैंसर हुआ. इस बार ब्रेस्ट कैंसर के सेल्स काफी छोटे थे. सर्जरी और हार्मोन थेरेपी से उनका इलाज किया गया. इस दौरान दीबा ने अपनी पढ़ाई भी चालू रखी.
नई जिंदगी की हुई शुरुआतदीबा ने बताया कि अपनी पढ़ाई और नौकरी के साथ उसने अपनी लाइफ की नई शुरुआत कर रही थी. हालांकि ये जानलेवा बीमारी इतनी आसानी से उसका पीछा नहीं छोड़ने वाली थी, साल 2022 में एक बार फिर उसकी तबीयत खराब हुई है, जब चेकअप हुआ तो पता चला उसे बोन और लंग्स कैंसर है. आज भी दीबा का इलाज चल रहा है. हर महीने दीबा को हार्मोन इंजेक्शन लगाएं जाते हैं. वहीं कैंसर के लिए उनकी ओरल मेडिसिन चल रही हैं. 
जब दीबा को मिला अवॉर्डदीबा ने एक बार नहीं 3 बार कैंसर जैसी घातक बीमारी का दंश झेला और उसका डटकर सामना किया, और अभी दीबा कैंसर के खिलाफ लड़ रही हैं. दीबा को पढ़ना और रिसर्च करना काफी पसंद हैं. उनकी मेहनत रंग भी लाई. साल 2024 में दीबा को बेस्ट पेपर एंड इमर्जिंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, ऑस्ट्रेलिया (Best Paper and Emerging Scientist Award, Australia) मिला. आज दीबा ना केवल अपनी सेहत बल्कि न्यूट्रिशनिस्ट ने नाते हजारों लोगों की सेहत का ध्यान रख रही हैं. 
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है.  Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.



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