Uttar Pradesh

बोतल, थर्मस और वाटर कूलर नहीं! पहले के जमाने में लोग इस चीज में रखते थे पानी, घंटों रहता था ठंडा

Last Updated:April 09, 2025, 23:54 ISTसूखने के बाद बकरे की खाल की सींम्मण की जाती है. तब कहीं जाकर मसक तैयार होती है,जिसका इस्तेमाल आप पानी के साथ-साथ तेल आदि चीजों को….X

मसक!बहराइच: पहले जमाने में लोग गर्मियों में पानी को अपने साथ ले जाने के लिए मसक का इस्तेमाल किया करते थे,जिसमें पानी ले जाने में आसानी होने के साथ-साथ पानी ठंड भी रहता था और कई दिन तक इसको सुरक्षित भी रखा जा सकता था.जो चमड़े आदि वस्तुओं से बना होता है. बदलते वक्त के साथ अब धीरे-धीरे इसका चलन भी बिल्कुल विलुप्त हो गया है.

मसक का इस्तेमाल पहले लोग कार्यक्रमों तथा दैनिक कार्यो के अवसर पर पानी ढ़ोने के लिए किया करते थे.पानी भरने,ढोने तथा छिड़काव के लिए चमड़े के पात्र अथवा बड़ी थैली का प्रयोग किया जाता है,जिसको देहात में मसक अथवा फारसी में मशक कहते हैं.छोटे मसक के लिए फारसी में मश्कीज शब्द का भी प्रचलन है.

लोकजीवन में मसक को मशक,चंगेली,चर्मघट, मश्क,खल्लड़ आदि नामों से पुकारा जाता है.मसक का प्रयोग मुख्य रूप से चिनाई करते समय तथा किसी उत्सव,संस्कार आदि में पानी के छिड़काव,पानी लाने आदि के लिए किया जाता रहा है.मसक को पानी भरकर पीठ के ऊपर लाद कर एक स्थान से दूसरे स्थान और लाया जाता है और हाथों से पकड़ कर उसके मुंह से पानी को निकाला जाता है और उससे छिडक़ाव भी किया जाता है. मशक का मुंह,जिसमें से पानी की धार निकलती है उसको कहा जाता है.जानें कैसे किया जाता था मसक तैयारमसक बनाने के लिए सबसे पहले बकरे तथा बकरी की खाल को खुरपियों के साथ उतारा जाता है, उसके फिर खाल खराब न हो उसके लिए उस पर नमक लगाया जाता है, नमक लगाने के बाद यह खाल चुने के पानी में डाली जाती है,चुने के पानी में डालने के बाद इसे दिन में कई बार पानी से घुल जाता है.फिर जब यह खाल तैयार हो जाती है,तो इसे चुने के खालों से निकालकर खुरपी से इसके बालों की सफाई की जाती है.उसके बाद कीकर की खसखस तथा नैसर्गिक रंगों से पानी डाल-डालकर इसे पकाया तथा रंग दिया जाता है. इसके बाद चमड़े को सुखाया जाता है.

सूखने के बाद बकरे की खाल की सींम्मण की जाती है. तब कहीं जाकर मसक तैयार होती है,जिसका इस्तेमाल आप पानी के साथ-साथ तेल आदि चीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने के लिए कर सकते हैं जिसमें पानी आदि चीजों को लाने से कठिनाई नहीं होती है,जिसको आप चाहे तो पीठ पर भी लाद कर बड़े आराम से ला सकते हैं जो एक बैग की तरह महसूस होता है.पहले जमाने में लोग सफर में पानी ले जाने के लिए इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया करते थे.बहराइच जिले के मोहल्ला चांदपुरा के रहने वाले जीशान हैदर मसक के बारे में बताते हैं.इसका इस्तेमाल लोग पहले नदियों से पानी लाने के लिए किया करते थे जीशान हैदर साहब की देखरेख में आज भी बहराइच जिले में एक मसक मौजूद है.
Location :Bahraich,Uttar PradeshFirst Published :April 09, 2025, 23:54 ISThomeuttar-pradeshबोतल, थर्मस और वाटर कूलर नहीं! पहले लोग इस चीज में रखते थे पानी

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