Last Updated:January 14, 2026, 21:09 ISTMakar Sankranti in Ballia: मकर संक्रांति पर बलिया की एक प्राचीन परंपरा जो सदियों से चली आ रही है. इसके तहत मायके से खिचड़ी आती है. इस खिचड़ी में केवल भोजन नहीं, बल्कि भावनाएं होती है. यहां मकर संक्रांति को खिचड़ी के रूप में तिलवा, तिलकुट, चिउड़ा, गुड़, मिठाई, कपड़ा, फल और सब्जियों के साथ अपनों का प्यार भेजने की परम्परा है. कमला भावुक होकर कहती है कि अब इस परंपरा को उनके भतीजे और नतीजे निभा रहे है. आज भी लगातार 60 साल से खिचड़ी लेकर वही लोग आते है और उसी से दिल भर जाता है.बलिया: ये उस दौर की बात है जब मोबाइल बहुत कम हुआ करते थ. उस समय बेटियों को मायके से मिलने का एक सुनहरा अवसर तीज और मकर संक्रांति लेकर आती थी. इसकी विशेष परम्परा आज भी भृगु मुनि की पावन पवित्र धरा पर रिश्तों की गर्माहट और परंपरा की अद्भुत संगम को बरकरार रखा है. इसी परंपरा की जीवंत मिसाल है बुजुर्ग महिला कमला चतुर्वेदी… बिल्कुल सही सुना आपने जिनकी आंखों में आज भी मायके की यादें और दिल में भाई-बहनों का स्नेह जिंदा है. कमला चतुर्वेदी के अनुसार वे दो भाई और दो बहनें थीं. समय के साथ भाई, माता-पिता इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन रिश्तों की डोर आज भी टूटी नहीं है. मकर संक्रांति और तीज आज भी इस परिवार के लिए बड़ा ही प्यारा इमोशनल और यादगार होता है.
आपको बताते चले कि मकर संक्रांति पर बलिया की एक प्राचीन परंपरा जो सदियों से चली आ रही है. इसके तहत मायके से खिचड़ी आती है. इस खिचड़ी में केवल भोजन नहीं, बल्कि भावनाएं होती है. यहां मकर संक्रांति को खिचड़ी के रूप में तिलवा, तिलकुट, चिउड़ा, गुड़, मिठाई, कपड़ा, फल और सब्जियों के साथ अपनों का प्यार भेजने की परम्परा है. कमला भावुक होकर कहती है कि अब इस परंपरा को उनके भतीजे और नतीजे निभा रहे है. आज भी लगातार 60 साल से खिचड़ी लेकर वही लोग आते है और उसी से दिल भर जाता है.
तीज और खिचड़ी पर्व है खासबलिया शहर के भृगु आश्रम निवासी 80 वर्षीय कमला चतुर्वेदी ने आगे कहा कि तीज और खिचड़ी पर्व ही ऐसे मौके होते हैं, जब मायके वालों से मिलना होता है. पुरानी यादें ताजा होती है और बीते दिनों की बातें साझा की जाती है. यह परंपरा केवल रस्म नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम है. भाई और भाभी का जिक्र आते ही कमला की आंखें नम हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि, उनकी भाभी दो साल पहले भगवान को प्यारी हो गई. भैया-भाभी बड़े प्रेम से टेंपो से खिचड़ी भिजवाते थे. अब भाई भी नहीं है. ये कमला चतुर्वेदी के शब्द थे जिसके बाद वे रो पड़ती है.
आज भी कमला को रहता है इंतजारकमला चतुर्वेदी ने आगे बड़ा गर्व से कहा कि उनके बड़े भतीजे राघव मिश्रा जो नगरपालिका में क्लर्क है और नातिन तासू खिचड़ी पहुंचा चुके है. वहीं, छोटे भतीजे विनायक मिश्रा के आने का उन्हें बेसब्री से इंतजार है. कल आएगा, उससे ढेर सारी बातें करूंगी. यह कहते हुए उनके चेहरे पर उम्मीद की चमक दिख रही थी. मकर संक्रांति की यह परंपरा संदेश भी देती है कि, भले ही समय बदल जाए, लोग बिछड़ जाएं, लेकिन सच्चे रिश्ते तिल-गुड़ की तरह हमेशा मिठास बांटते रहते हैं. बलिया की यह परंपरा आज भी हमें सिखाती है कि त्योहार केवल तिथि नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का एक प्रगाढ़ माध्यम होते है.About the AuthorManish Raiकाशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ेंLocation :Ballia,Uttar PradeshFirst Published :January 14, 2026, 21:09 ISThomeuttar-pradeshमकर संक्रांति पर मायके की मिठास और रिश्तों का प्यार,कहानी बताते भावुक हुई कमला

