स्तन कैंसर से जूझ रही मरीजों के लिए राहत की खबर. अब गोवा मेडिकल कॉलेज, बंबोलिम में स्तन कैंसर का इलाज कराने वाले मरीजों को फिक्स्ड-डोज वाली ‘पर्टुजुमाब-ट्रास्टुजुमाब’ नाम की दवा मुफ्त में मिलेगी. वैसे इस दवा की कीमत 4.2 लाख रुपये है.
स्वास्थ्य मंत्री विश्वजित राणे ने बताया कि गोवा देश का पहला राज्य है, जो इस दवा को अपने इलाज प्रोटोकॉल में शामिल कर रहा है और मरीजों को इसे मुफ्त दे रहा है. इस दवा को रविवार को विश्व कैंसर दिवस के मौके पर जीएमसी में लॉन्च किया गया. यह इंजेक्टेबल दवा HER2-पॉजिटिव स्तन कैंसर रोगियों को पारंपरिक घंटे भर चलने वाले इंट्रावेनस ड्रिप के विकल्प के रूप में दी जाती है. यह ना सिर्फ मरीजों को आराम देता है, बल्कि दवा को शरीर में पहुंचाने में भी ज्यादा कारगर है.स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यह दवा ‘फेसगो’ ब्रांड नाम से रोश हेल्थ केयर द्वारा पेश की गई है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जीएमसी में पात्र मरीजों को यह दवा मुफ्त में उपलब्ध कराएगी. रविवार को स्वास्थ्य मंत्री ने डीन डॉ. शिवानंद बंदेकर और अन्य वरिष्ठ डॉक्टरों की मौजूदगी में ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. अनुपमा बोरकर के देखरेख में एक मरीज को यह दवा दी.
विश्वजित राणे ने कहा कि हमें जीएमसी में पर्टुजुमाब-ट्रास्टुजुमाब फिक्स्ड ड्रग कॉम्बिनेशन शुरू करने की घोषणा करते हुए गर्व है, जो स्तन कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण सफलता है. यह नया तरीका न केवल मरीजों को आराम देता है बल्कि कैंसर की देखभाल को आगे बढ़ाने की हमारे वादे को भी दर्शाता है. यह अद्भुत दवा अब मरीजों के लिए मुफ्त उपलब्ध है, यह भारत में एक अनूठी पहल है और बीमारी को ठीक करने और मरीजों को शुरुआती दौर में रोकने का अवसर देती है, जिससे जान बचती है.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह दवा स्तन कैंसर का शुरुआती इलाज कर सकती है. नए और एडवांस उपचारों को आगे बढ़ाने के लिए हमारी मजबूत वादे सुनिश्चित करती है कि हर कोई लेटेस्ट मेडिकल सॉल्यूशन से लाभ उठा सकता है. यह हमारे स्तन कैंसर से लड़ने के तरीके में एक बड़ा बदलाव है, जो पूरे देश में महिलाओं के लिए आशा और उपचार का एक नया युग ला रहा है. राणे ने कहा कि इस पहल से सालाना लगभग 12 मरीजों को लाभ होगा.
डॉ. बोरकर ने कहा कि यह विशेष दवा स्तन कैंसर से नव-डायग्नोस मरीजों को सर्जरी से पहले दी जाती है. उन्होंने कहा कि यह कॉम्बिनेशन न केवल स्तन कैंसर के उपचार के प्रभाव में योगदान देगा बल्कि मरीजों के लिए मेडिकल प्रक्रिया को भी सरल बनाएगा.
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