बहराइच की आरती सिंह ने विकसित किया एआई ऐप, किसानों को मिलेगी फसल से जुड़ी जानकारी
बहराइच. यूपी की रहने वाली महिला आरती सिंह शिक्षा दिक्षा लेने के बाद अमेरिका में कृषि क्षेत्र में बतौर वैज्ञानिक के पद पर है. बीते दिन पहले बहराइच प्राइवेट दौरे के दौरान किसानों से मिली जहां पर इन्होंने एक एप्लिकेशन के बारे में किसानों को जानकारी दी. यह ऐप एआई द्वारा किसानों को उनकी फसलों की खरपतवार की खाद और पानी की जानकारी देगा. इस AI एप्लिकेशन को यूपी की आरती सिंह अपनी टीम के साथ मिलकर “बेस्ट आईडी व्हाट” के नाम से बना रही हैं. जो कृषि क्षेत्र में न सिर्फ किसान की फसलों से संबंधित जानकारी देगा बल्कि खेत से जुड़ी तमाम समस्याओं को मात्र एक फोटो खींचने से ही हल कर देगा. यह एप्लीकेशन आईसीआर द्वारा चार कंट्री में अमेरिका के साथ शुरू किया जाएगा. जिसमें जापान, अमेरिका, भारत, कनाडा जैसे देश शामिल है. इसमें दो एप्लीकेशन को लॉन्च भी कर दिया गया है. जिनको भारत में किसानों की सहायता के लिए हिंदी भाषा में जल्द उतारने का प्रयास किया जा रहा है.
यह एप्लीकेशन आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस
इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एप्लीकेशन में लाखों फोटो डाले गए हैं और यह तीन से चार हजार खेत में नुकसान दायक और फायदेमंद कीटों को मात्र फोटो खींचने से ही उनके बारे में बता देगा. जिससे किसान भाई यह समझ पाएंगे कौन से कीट उनके खेतों के लिए नुकसानदायक है. कौन से फायदेमंद, इसके अलावा यह एप्लीकेशन खेतों में खरपतवार खेत में खाद पानी की जरूरत सब कुछ मात्र एक फोटो से ही मुश्किलों को आसान कर देगा. यह एप्लीकेशन किसानों को उनकी फसलों की खरपतवार की खाद और पानी की जानकारी देगा. जिससे किसान अपनी फसलों को सही तरीके से प्रबंधित कर सकेंगे.
कौन है यूपी की आरती सिंह जिन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर ऐप में दिया है योगदान
पिता डॉ. घनपाल सिंह पूर्व निदेशक शोध गोबिंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौघोगिक विश्वविद्यालय पंतनगर वहीं पर जन्मी बेटी आरती सिंह जिनकी शादी पड़ोस के जिले मुजफ्फरनगर में हुई. जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपनी शिक्षा दीक्षा से अमेरिका के आयोवा राज्य विश्ववियालय में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद प्राप्त किया. कृषि क्षेत्र में तमाम कार्य किया इन कार्यों में से एक महत्वपूर्ण कार्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कृषि क्षेत्र में एक अद्भुत एप्लीकेशन को तैयार करना भी है. जिसका लाभ जल्द भारत के किसान भी उठा पाएंगे.

