BCCI: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की खबर आ रही है. बोर्ड को राष्ट्रीय खेल संचालन विधेयक 2025 के अंतर्गत लाने की तैयारी चल रही है. ऐसे में बीसीसीआई अध्यक्ष की कुर्सी को भी खतरा हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार मौजूदा मानसून सत्र में ही राष्ट्रीय खेल संचालन विधेयक 2025 पेश करने वाली है. बीसीसीआई एकमात्र प्रमुख खेल संस्था थी, जो सरकारी नियमों के दायरे में नहीं आती थी.
रोजर बिन्नी को लेकर बड़ा सवाल
आईएएनएस को खेल मंत्रालय के सूत्रों से यह जानकारी मिली. खेल मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि बीसीसीआई समेत सभी महासंघों के लिए एनएसपी के अंतर्गत आना अनिवार्य होगा. अब सबसे बड़ा सवाल है कि बीसीसीआई अध्यक्ष रोजर बिन्नी पद पर बने रहेंगे. बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति 70 साल की उम्र तक ही अध्यक्ष की कुर्सी पर रह सकता है.
बिन्नी हुए की उम्र 70 पार
बिन्नी बीते 19 जुलाई को 70 साल के हो गए. सितंबर में बीसीसीआई की वार्षिक आम बैठक होने वाली है. देखना होगा कि बिन्नी को अध्यक्ष बने रहने दिया जाता है या वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला पदभार संभालते हैं. यह विधेयक अक्टूबर 2024 से प्रक्रियाधीन है. इसका उद्देश्य खेलों के विकास और संवर्धन, खिलाड़ियों के लिए कल्याणकारी उपायों, खेलों में नैतिक प्रथाओं और उनसे जुड़े या प्रासंगिक मामलों का प्रावधान करना है.
क्यों हो रहा ऐसा?
अब एक सवाल ये भी है कि आखिर ऐसा होने से क्या फायदा और नुकसान होगा. इसके निम्न उद्देश्य होंगे-
1. राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSF) पर नजर: निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना.2. शासन में खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व का अभाव : एथलीट समितियों के माध्यम से खिलाड़ियों को शामिल करना और उत्कृष्ट योग्यता वाले खिलाड़ियों का अनिवार्य रूप से शामिल होना.3. मुकदमेबाजी : अदालती मामलों को कम करने के लिए स्पष्ट चुनावी दिशानिर्देश और विवाद समाधान तंत्र स्थापित करना.4. खिलाड़ियों का चयन: क्रिकेट में सेलेक्टर्स पर कई सवाल होते हैं. कई बार अनुचित तरह से प्लेयर्स की एंट्री हो जाती है. लेकिन इस विधेयक के बाद चयन मानदंडों को मानकीकृत करना और योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित करने के लिए ट्रायल और परिणामों के प्रकाशन को अनिवार्य करना भी इसका उद्देश्य होगा. 5. उत्पीड़न और असुरक्षित खेल वातावरण: शिकायतों के लिए सुरक्षित खेल तंत्र, पीओएसएच अनुपालन और स्वतंत्र समितियों का गठन अनिवार्य करना.
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