बरसात के मौसम में पौधों पर कीटों और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है
बरसात के मौसम में पौधों पर कीटों और बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है. लगातार नमी और उमस के कारण पत्तियों पर फफूंद लगना, जड़ों का सड़ना, माहू, मिलीबग जैसे कीटों का हमला और फल-सब्जियों में छेद करने वाले कीड़े आम समस्या बन जाते हैं. इससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और उनकी पैदावार पर सीधा असर पड़ता है. हालांकि, इन समस्याओं से बचाव के लिए रासायनिक दवाओं के बजाय देसी उपाय अधिक सुरक्षित और कारगर माने जाते हैं.
पेड़ों में कीड़ा लगने की समस्या से निपटने के लिए एक आसान उपाय यह है कि पेड़ की जड़ से थोड़ी दूरी बनाकर चारों ओर खुदाई करनी चाहिए. इसके बाद गड्ढे को 2-4 दिन तक खुला छोड़ दें ताकि जड़ में हवा लग सके. जब मिट्टी सूख जाए तो उसमें फ्योरा डॉम दवाई और नीम की खल्ली मिलाकर डालें और फिर मिट्टी से भराई कर दें. ऐसा करने से पेड़ की जड़ पुनः स्वस्थ हो जाती है और उसकी उम्र भी बढ़ जाती है.
गुलाब के पौधे में अक्सर एक समय बाद सूखने की समस्या देखी जाती है. लेकिन अगर उसमें यह दवा और नीम की खल्ली डाल दी जाए तो पौधा पूरी तरह स्वस्थ रहता है. यही तरीका आम समेत अन्य पौधों पर भी अपनाया जा सकता है. इससे पौधे लंबे समय तक हरे-भरे और मजबूत बने रहते हैं.
सरसों की खली का भी इस्तेमाल किया जा सकता है
गमले में इस्तेमाल का तरीका बताते हुए वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि इसमें खास सावधानी रखनी पड़ती है क्योंकि गमले में मिट्टी की मात्रा सीमित होती है. सबसे बेहतर तरीका यह है कि दवा को लिक्विड फॉर्म में तैयार कर लें और एक जग के हिसाब से पौधे की जड़ों में डालें. इसके इस्तेमाल से 2 दिन पहले गमले की मिट्टी को हल्की खुदाई कर दें ताकि जड़ों में हवा लग सके. इसके बाद जब दवा डालेंगे तो असर और ज्यादा होगा. यदि इसमें सरसों की खल्ली भी मिला दी जाए तो पौधों में फूल और फल आने की क्षमता दोगुनी हो जाती है. पौधे पूरी तरह स्वस्थ बने रहते हैं और फ्लावरिंग भी बेहतर होती है.