सर्वेश श्रीवास्तव/अयोध्या. मंदिर और मूर्तियों के शहर अयोध्या में वैसे तो लगभग 8000 मठ मंदिर है. हर मंदिर की अपनी अलग परंपरा अलग मान्यता है. कई ऐसे ऐतिहासिक और प्राचीन मठ मंदिर आज भी स्थित है जिसका इतिहास भी प्राचीन है. आज हम आपको इस रिपोर्ट में एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जहां से कभी मां सरयू बहा करती थी. आज वहां पर शालिग्राम के रूप में प्रगटे रामलला की पूजा आराधना की जाती है. हम बात कर रहे हैं राम जन्मभूमि से मात्र 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित रामघाट में तपस्वी छावनी है.तपस्वी छावनी मंदिर में जहां सैकड़ों वर्ष पूर्व शालिग्राम से रामलला प्रकट हुए थे.यह मंदिर कई वर्ष पुराना है इतना ही नहीं मंदिर के संरक्षक जगत गुरु परमहंस आचार्य बताते हैं कि प्राचीन काल से ही पूरे देश के संत यहां पर आकर ठहरते थे. संतों का एक बड़ा हिस्सा इसी स्थान पर आकर रूकता था. धीरे-धीरे संत जब पूरे देश से आने लगे और यहां पर रुकने लगे तो इस पूरे पीठ को तपस्वी जी की छावनी नाम दिया गया. इस मंदिर की आचार्य परंपरा बहुत प्राचीन है.सैकड़ों वर्ष पूर्व मां सरयू की जलधारा यहीं से बहती थीपरमहंस आचार्य ने दावा करते हुए बताया कि प्राचीन काल में आचार्यों के कालखंड में शालिग्राम से भगवान राम यहां प्रकट हुए थे तभी से यह जगह और भी प्रसिद्ध हुई. इतना ही नहीं इस मंदिर में दूध से बने मिष्ठान का ही भोग भी लगाया जाता है.परमहंस आचार्य बताते हैं कि अयोध्या के प्रमुख छावनी में से तपस्वी जी की छावनी सबसे प्राचीन छावनी है. इसकी स्थापना 17वीं और 18वीं शताब्दी में स्वामी रामदेव महाराज ने किया था. हालांकि सैकड़ों वर्ष पूर्व मां सरयू की जलधारा यहीं से बहती थी. समय बीता कालखंड बदला मां सरयू की जलधारा पीछे छुटी तो वहां आबादी बसी और आज रामघाट के नाम से पूरा एरिया जाना जाता है..FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 20:49 IST
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