Last Updated:February 07, 2026, 21:52 ISTBahraich Latest News : बहराइच जिले के रामेश्वर पवन की कहानी सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष की मिसाल है. छुआछूत की एक घटना ने उन्हें लेखक बना दिया. अधिवक्ता से समाजसेवी बने रामेश्वर पवन ने गद्य और पद्य में 64 किताबें लिखकर दलित और ओबीसी समाज की आवाज को मजबूती दी. उनकी लेखनी समाज को सोचने और बदलने का संदेश देती है.बहराइच : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है. जहां छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के विरोध ने एक व्यक्ति को लेखक बना दिया. पेशे से अधिवक्ता रहे रामेश्वर पवन ने वकालत छोड़ समाज सुधार और लेखन को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया. उनकी लेखनी आज दलित. ओबीसी और वंचित समाज की आवाज बन चुकी है.
अधिवक्ता से समाजसेवी लेखक बनने का सफरबहराइच जिले के रहने वाले रामेश्वर पवन पेशे से अधिवक्ता हैं. लेकिन वर्तमान समय में वह वकालत नहीं करते. उनका पूरा जीवन सामाजिक कार्य और लेखन को समर्पित है. उन्होंने अब तक गद्य और पद्य मिलाकर 64 किताबें लिखी हैं. इन पुस्तकों में सामाजिक विषमता. छुआछूत और जातिगत भेदभाव को प्रमुखता से उठाया गया है.
छुआछूत की घटना से बदली सोचरामेश्वर पवन बताते हैं कि उनकी लेखनी की शुरुआत एक घटना से हुई. प्राथमिक शिक्षा के दौरान उनके एक दलित मित्र की केवल जाति के कारण पिटाई कर दी गई. वह अपने मित्र को घर ले आए. लेकिन जब उनकी मां ने उस मित्र को पत्तल में भोजन दिया तो उन्होंने इसका विरोध किया. वे बाजार गए और एलमुनियम की थाली लाकर मित्र को भोजन कराया. इसी घटना ने उनके भीतर लेखक बनने का बीज बो दिया.
ज्ञान की तलाश और वैचारिक प्रेरणाइसके बाद उन्होंने एससी. ओबीसी समाज से जुड़ी जानकारियां जुटानी शुरू कीं. कानून की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात समाजवादी चिंतक रामस्वरूप वर्मा से हुई. रामेश्वर पवन बताते हैं कि रामस्वरूप वर्मा एक समय वित्त मंत्री भी रहे और उन्होंने लाभ का बजट पेश किया था. आईएएस क्वालीफाई करने के बाद भी उन्होंने समाज सेवा को चुना. उनसे प्रेरणा लेकर रामेश्वर पवन ने लेखन को अपना मिशन बना लिया.
बुद्ध, अंबेडकर और पटेल पर लिखीं किताबेंरामेश्वर पवन ने भगवान बुद्ध पर ढाई हजार पेज की गद्य और पद्य में रचना की. इसके अलावा डॉ भीमराव अंबेडकर और सरदार वल्लभभाई पटेल पर भी पुस्तकें लिखीं. उन्होंने दलित और ओबीसी समाज की जातियों को खंगालकर उनके इतिहास. संघर्ष और सामाजिक स्थिति पर विस्तार से लिखा.
लेखनी को मानते हैं जागरूकता का माध्यमलेखक का कहना है कि लेखनी का असली आनंद तब है जब उसमें पूरी तरह डूबा जाए. वह मानते हैं कि कई बार व्यक्ति को समझाने से बात समझ में नहीं आती. लेकिन जब वही बात किसी किताब के माध्यम से सामने आती है तो व्यक्ति आत्ममंथन करने लगता है. यही लेखन की सबसे बड़ी ताकत है.
पहली किताब देवासुर संघर्षरामेश्वर पवन की पहली किताब देवासुर संघर्ष थी. इस किताब को लिखने का उद्देश्य समाज में फैली उस सोच को उजागर करना था. जिसमें दलितों को असुर और उच्च जाति के लोगों को सुर बताया जाता है. इस पुस्तक से पहले उन्होंने पांच खंडों में एक कविता लिखी थी. जिसका नाम अर्जुन मोह रखा गया.
अब भी जारी है लेखन का कारवांपहली किताब के बाद उनका लेखन लगातार चलता रहा. आज भी उनकी कलम समाज की कुरीतियों के खिलाफ चल रही है. रामेश्वर पवन का मानना है कि जब तक समाज में असमानता रहेगी. तब तक लेखनी का दायित्व भी बना रहेगा. उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बदलाव की सोच रखते हैं.Location :Bahraich,Uttar PradeshFirst Published :February 07, 2026, 21:52 ISThomeuttar-pradeshवकालत छोड़ी, लेखनी थामी, 64 किताबों से समाज को आईना, जानें रामेश्वर की कहानी

