Uttar Pradesh

Animal Husbandry : रामपुर के पप्पू ने पाल रखे ऐसे जीव, 10 हजार रुपये किलो इसका घी, 15 हजार की एक

Last Updated:February 07, 2026, 22:35 ISTAnimal Husbandry Rampur : रामपुर के रहने वाले पप्पू ने इसे रोजगार का मजबूत जरिया बना लिया है. उनके परिवार में कई पीढ़ियों से भेड़पालन होता आया है. उनके दादा भी भेड़ पालते थे. इसके बाद उनके पिता ने इस काम को संभाला. अब पप्पू इसे आगे बढ़ा रहे हैं. शुरुआत 6 भेड़ों से की. धीरे-धीरे काम बढ़ता गया. आज उनके पास 35 देशी भेड़ें हैं. इनका सही देखभाल और खानपान का ध्यान रखना सबसे जरूरी है. समय पर चारा और साफ पानी मिलता रहे तो इनकी सेहत चकाचक रहती है. भेड़ का घी 10 हजार रुपये किलो तक बिकता है.रामपुर. भेड़ पालन यूपी के पालकों की किस्मत बदल रही है. रामपुर के रहने वाले पप्पू ने भेड़पालन को सिर्फ परंपरा ही नहीं बल्कि मजबूत रोजगार का जरिया बना लिया है. लोकल 18 से बात करते हुए पप्पू कहते हैं कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से भेड़पालन का काम होता आ रहा है. उनके दादा भी भेड़ पालते थे. इसके बाद उनके पिता ने इस काम को संभाला और अब पप्पू इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. पप्पू का कहना है कि ये काम नौकरी से अच्छा है. अपने हिसाब से काम करने की आजादी भी मिलती है. पप्पू बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में सिर्फ 6 भेड़ों से काम शुरू किया. धीरे-धीरे मेहनत और देखभाल के कारण उनका काम बढ़ता गया. आज उनके पास 35 देशी भेड़ें हैं. वे बताते हैं कि भेड़पालन में सबसे जरूरी चीज पशुओं की सही देखभाल और खानपान का ध्यान रखना होता है. अगर भेड़ों को समय पर चारा और साफ पानी मिलता रहे तो उनकी सेहत अच्छी रहती है और उत्पादन भी बढ़िया होता है.

15 हजार तक की एक

पप्पू बताते हैं कि भेड़पालन से उन्हें कई तरह से कमाई होती है. भेड़ों का दूध निकालकर उससे घी तैयार किया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है. भेड़ का घी 10 हजार रुपये किलो तक बिकता है. देसी भेड़ों के घी को लोग काफी पसंद करते हैं. भेड़ हर छह महीने में बच्चा देती है, जिससे पशुओं की संख्या बढ़ती रहती है. ये भी कमाई का अच्छा जरिया है. साल में 30 बच्चे तैयार हो जाते हैं. एक भेड़ की 12 से 15 हजार रुपये तक की कीमत मिलती है. इस हिसाब लाखों में मुनाफा हो जाता है.

चारे का खर्च कम

पप्पू बताते हैं कि साल में एक बार बड़ी भेड़ों को बेचकर भी अच्छी आमदनी हो जाती है. बाजार में भेड़ों की कीमत वजन और नस्ल के हिसाब से तय होती है. अगर सही तरीके से भेड़पालन किया जाए तो इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है. पप्पू रोज सुबह भेड़ों को चराने खुले मैदान और खेतों की तरफ ले जाते हैं. भेड़ें हरी घास खाती हैं जिससे चारे का खर्च भी कम हो जाता है. शाम को वह उन्हें वापस घर लाकर उनकी देखभाल करते हैं. मौसम बदलने पर भेड़ों का खास ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि उस समय बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है. पप्पू का मानना है कि गांव के युवाओं के लिए भेड़पालन एक अच्छा रोजगार बन सकता है. इस काम में ज्यादा बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं पड़ती.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Rampur,Uttar PradeshFirst Published :February 07, 2026, 22:35 ISThomeagricultureरामपुर के पप्पू ने पाल रखे ऐसे जीव, 10 हजार रुपये किलो इसका घी, 15 हजार की एक

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