अमेठी में गर्मी के कारण गेहूं की फसल पर प्रतिकूल असर दिखने लगा है. सामान्य दिनों की तुलना में इस बार गर्मी जल्दी बढ़ी है, जिससे खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है. इसके साथ ही फसल पूरी तरह प्रभावित हो रही है. हालांकि, प्रशासन ने भी किसानों की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग को नहर में पानी छोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. लेकिन किसानों की चिंता ऐसी है कि वे अपनी फसल किसी भी हाल में बर्बाद नहीं होने देना चाहते. किसान फसल बचाने के लिए बार-बार सिंचाई कर रहे हैं. इससे उत्पादन लागत बढ़ रही है और लाभ घट रहा है.
किसानों का कहना है कि विपरीत मौसम का पूरा असर फसल पर हो रहा है और प्रकृति उनका साथ नहीं दे रही है. किसानों का कहना है कि दाना भराव के समय ठंडक आवश्यक रहती है. अधिक तापमान रहने पर बालियां समय से पहले पकने लगती हैं, जिससे दाना हल्का रह सकता है. अमेठी के किसान रामनारायण यादव बताते हैं कि इस समय एक अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है. डीजल और बिजली का खर्च बढ़ने से चिंता बढ़ गई है. तेज धूप के कारण खेतों में नमी बनाए रखना कठिन हो रहा है. वहीं एक और किसान सूर्यभान द्विवेदी बताते हैं कि नहर में पानी की समस्या है. बार-बार सिंचाई करने के लिए डीजल के जरिए ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है. इसके साथ ही गर्मी के कारण फसल में रोग न लगे, इसलिए खाद और कीटनाशक पर भी अतिरिक्त खर्च हो रहा है. मौसम समय से पहले बदल गया है, जिसके कारण किसानों को समस्या हो रही है. अधिकारियों को यदि फसल का नुकसान होता है तो उसका मुआवजा भी किसानों को उपलब्ध कराना चाहिए.
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश यादव ने बताया कि तापमान में वृद्धि का असर गेहूं की पैदावार पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों के खेतों की मॉनिटरिंग की जा रही है और उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेत की नियमित निगरानी करें और जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करें. उन्होंने कहा कि नमी संरक्षण के लिए खेत में मेड़ों की मरम्मत और खरपतवार नियंत्रण जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और फसल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.

