World Alzheimer’s Day: आज वर्ल्ड अल्जाइमर डे है. दुनियाभर में इस दिन को जागरूकता और बचाव के तौर पर मनाया जाता है. आज के समय में तेजी से बढ़ रहे अल्जाइमर के मरीजों में इसका जोखिम कम करना एकमात्र उद्देश्य है. बीते कुछ समय से बढ़ती उम्र वालों में दिमागी बीमारी का अधिक खतरा देखने को मिल रहा है. अल्जाइमर इन्हीं में से एक है. बुजुर्गों को होने वाली इस दिमागी बीमारी का अगर समय रहते इलाज किया जाए तो जान जाने का खतरा कम हो सकता है. ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल आता है कि क्या अल्जाइमर को हमेशा के लिए जड़ से खत्म किया जा सकता है. आइये जानते हैं विशेषज्ञों का इस बारे में क्या कहना है.
अल्जाइमर किस तरह करता है ब्रेन को डैमेज विशेषज्ञों का अल्जाइमर डिजीज को लेकर कहना है कि ये एक तरह का ब्रेन में होने वाला प्रोग्रेसिव न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है. इसमें लोगों की मेमोरी वीक होने लगती है. इतना ही नहीं अधिकांश लोग अपनी दैनिक जरूरतों की चीजें भी भूलने लगते हैं. इसे डिमेंशिया का एक कॉमन टाइप भी कहा जा सकता है. अल्जाइमर डिजीज की वजह से ब्रेन सिकुड़ने लगता है और सेल्स डैमेज होने लगती हैं. इससे लोगों का व्यवहार और सामाजिक गतिविधियों में बदलाव आने लगता है. जानकारी के अनुसार, यह बीमारी 70 साल से अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करती है. वहीं अगर कोई डायबिटीज, ब्लड प्रेशर का शिकार है तो अल्जाइमर का जोखिम ब्रेन को डैमेज कर सकता है.
क्या हैं लक्षण अल्जाइमर डिजीज के कुछ कास लक्षण होते हैं. जिससे इस बीमारी का पता लग सकता है. जैसे 70 के बाद की उम्र के किसी व्यक्ति को रात में नींद न आना, रखी हुई चीजों को जल्दी भूल जाना, आंखों की रोशनी कम होना, छोटे-छोटे कामों को करने में भी परेशानी होना, अपने स्वजन को न पहचान पाना. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी को पूरी तरह से कंट्रोल करना संभव नहीं है. लेकिन कुछ दवाइयों और उपायों से इसकी स्पीड को कम किया जा सकता है. इसका मतलब ये है कि एक बार ये बीमारी होने के बाद सारी उम्र रहती है.
इन्हें ज्यादा खतरा90 से ज्यादा उम्र के लोगों को अल्जाइमर डिजीज होने का खतरा बना रहता है. वहीं 70 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को इस बीमारी का 10 से 20 प्रतिशत होने खतरा रहता है. 50 की उम्र वालों को अल्जाइमर का खतरा कम होता है. हालांकि जेनेटिक कारणों के चलते ये बीमारी युवाओं को प्रभावित कर सकती है.
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