Uttar Pradesh

Aligarh Potato : फ्राई सोना से लेकर सुपर सिक्स तक, अलीगढ़ के ऐसे आलू जिन्हें ईरान भी खा रहा, अमेरिका भी मुरीद

Last Updated:January 09, 2026, 17:58 ISTAligarh Potato Export : देश-दुनिया में अब तक ताला और तालीम के शहर के रूप में जाना जाता रहा अलीगढ़ बीते कुछ समय से अपने आलू के लिए भी अलग पहचान बना रहा है. स्थानीय मंडियों से निकलकर अलीगढ़ का आलू ईरान, दुबई, ओमान, कुवैत से लेकर अमेरिका तक को मुरीद बना रहा है. एग्री शाइन एफपीओ और राशि कोल्ड स्टोरेज किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए आगे आए हैं. अलग-अलग देशों में आलू के साइज और किस्म की पसंद अलग होती है. इसका ध्यान रखा जा रहा है.अलीगढ़. उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ देश-दुनिया में ताला और तालीम के शहर के नाम से जाना जाता रहा है, लेकिन बीते कुछ समय से अलीगढ़ का आलू भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. स्थानीय मंडियों से निकलकर अलीगढ़ का आलू अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ईरान, दुबई, ओमान, कुवैत से लेकर अमेरिका जैसे देशों तक अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है. हाल के दिनों में जब स्थानीय बाजारों में आलू के दाम कम हुए हैं, तब कुछ किसानों ने एफपीओ यानी कि फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन और कोल्ड स्टोरेज के सहयोग से विदेशी बाजारों की ओर रुख किया है. उद्यान विभाग के उप निदेशक बलजीत सिंह ने बताया कि अलीगढ़ में एग्री शाइन एफपीओ और राशि कोल्ड स्टोरेज जैसे संस्थान किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

विदेशी बाजारों की मांग के अनुसार अब अलीगढ़ में आलू की खेती की रणनीति भी बदली जा रही है. अलग-अलग देशों में आलू के साइज और किस्म की पसंद अलग होती है. कहीं बड़े साइज के आलू की मांग है तो कहीं बहुत छोटे साइज के आलू भी पसंद किए जाते हैं. कुछ वैरायटी ऐसी हैं जिनमें ड्राई मैटर प्रतिशत अधिक होता है, जिससे उनकी मांग और बढ़ जाती है.

ये सावधानियां जरूरी

बलजीत सिंह बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलीगढ़ की कई किस्में खासतौर पर पसंद की जा रही हैं. इनमें चिप सोना, फ्राई सोना, फ्राई होम, सूर्या, मलबरी ब्यूटी और सुपर सिक्स जैसी वैरायटी शामिल हैं. इन किस्मों की गुणवत्ता और उपयोगिता के चलते विदेशी खरीदार इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं. हालांकि निर्यात के लिए कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. आलू पर किसी प्रकार के दाग या रोग नहीं होने चाहिए और खेती में कीटनाशकों व एग्रो-केमिकल्स का प्रयोग न्यूनतम होना चाहिए. इसी दिशा में किसानों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर गोष्ठियां और बैठकों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि वे निर्यात योग्य आलू का उत्पादन कर सकें.

बलजीत सिंह के मुताबिक, विभागीय स्तर पर भी किसानों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. आलू निर्यात से न सिर्फ विदेशी मुद्रा अर्जित हो रही है, बल्कि किसानों को बेहतर मुनाफा भी मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान उन वैरायटी पर ज्यादा फोकस करें, जिनकी विदेशों में मांग है, तो अलीगढ़ से आलू का निर्यात आने वाले समय में और बढ़ सकता है. चालू वित्तीय वर्ष में अब तक करीब नौ कंटेनर आलू खाड़ी देशों में भेजे जा चुके हैं. एक कंटेनर में औसतन 30 टन आलू आता है. आने वाले महीनों में यूरोप और दूसरे महाद्वीपों के बाजारों तक पहुंच बनाने की भी कोशिशें जारी हैं.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Aligarh,Uttar PradeshFirst Published :January 09, 2026, 17:58 ISThomeagricultureअलीगढ़ के ऐसे 6 आलू जिन्हें ईरान भी खा रहा, अमेरिका भी मुरीद, जानें

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