अलीगढ़ . अलीगढ़ के ब्लाक अकराबाद के गांव राजीपुर में गौशाला मवेशियों के लिए कब्रगाह बनाता जा रहा है. जहां ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम प्रधानों द्वारा गौवंश देखरेख से लेकर गोवंश के चारे तक के खर्च का बंदरबाट होने से गौशाला में गौवंशों की तड़प-तड़प कर मौत हो रही है. स्थानीय लोगों की शिकायतों पर भी सरकारी तंत्र गहरी नींद में सो रहा हैं. वहीं लोगों ने सो रहे अधिकारीयों को जगाने के लिऐ काफी प्रदर्शन भी किया लेकिन सरकारी तंत्र की कान में जूं तक नहीं रेंग रहा . मजबूर होकर ब्लाक अकराबाद के गांव राजीपुर के लोगों ने गौशाला को गौवंशों की मौत का घर कहना शुरू कर दिया.स्थानीय व्यक्ति गुलाब सिंह ने बताया कि गौशाला में गौवंश आते है सामने के गेट से परंतु पीछे उनकी मौत हो जाता है . जहां भूख-प्यास से तड़प कर गौवंशों की मौत हो रही हैं. अधिकारी आकर खानापूर्ति कर चले जाते है. वहीं गौवंशों की देखरेख कर रहे सुखदेव ने बताया कि गौवंशों के चारे के लिए 30 रूपये प्रति पशु के हिसाब से पैसा दिया जाता है . वर्तमान मे इस गोशाला मे 19 गोवंश हैँ लेकिन इतने कम पैसों मे इन पशुओं का कुछ नहीं होता, देखरेख करने के एवज में 3500 रुपए मिलते हैं. जो मनरेगा मजदूरी से भी कम है, पिछले 7 माह से वेतन ही नहीं मिला, वहीं ब्लाक अकराबाद क्षेत्र में अन्य गौशालाओं की दुर्दशा भी देखने लायक है.गौशाला का महत्वगाय पालन के लिए प्रयुक्त घर गौशाला कहलाता है. हिन्दू धर्म में गाय को माता माना जाता है और उसकी हर तरह से सेवा एवं रक्षा करना पुण्य का काम माना जाता है. भारत में बहुत गौशालाएं हैं . इन्हें संचालित करने के लिए सरकार भी धन देती है तथा गाय प्रेमी भी दान करते है. कुछ धनी लोग भी गौशाला चलाते हैं.ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|FIRST PUBLISHED : March 18, 2023, 21:53 IST
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