प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरि की मौत (Narendra Giri Death) से संत समाज ही नहीं पूरा देश सन्न है. पुलिस (Police) की तफ्तीश में आत्महत्या (Suicide) की बात सामने आ रही है. हालांकि सभी ये जानकर हैरान हैं कि जो व्यक्ति समाज को दिशा दिखाता हो, वह आत्महत्या जैसी ओछी हरकत कैसे कर सकता है. एक संत आत्महत्या कैसे कर सकता है, सभी इसी सवाल का जवाब चाहते हैं. हालांकि पुलिस की तफ्तीश जारी है. जांच के बाद सभी तथ्य सामने आएंगे कि नरेंद्र गिरि की हत्या हुई या उन्होंने आत्महत्या की. अगर आत्महत्या की तो वो कौन सी वजह थी जिसने एक संत को भी तोड़ दिया.
लेकिन, यह पहला मौका नहीं है जब किसी संत ने आत्महत्या की या उनकी हत्या की गयी या फिर हत्या की कोशिश की गई. अतीत को खंगालने पर पता चलता है कि पहले भी ऐसे कई मौके आये हैं जब ऐसी घटनाओं से देश भर में सन्नाटा पसर गया. आइये जानते हैं कि उन पांच बड़े संतों के बारे में जिनकी मौत से पूरे देश में निराशा फैल गयी.
महंत नरेंद्र गिरि प्रयागराज के मठ बाघंबरी के गद्दीनशीन और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत से न सिर्फ पूरा संत समाज बल्कि पूरे देश में निराशा का माहौल है. नरेंद्र गिरि की लाश प्रयागराज में उनके मठ के ही एक कमरे में लटकती मिली. पहली नजर में पुलिस ने आत्महत्या करार दिया है लेकिन, हत्या की आशंका को सिरे से खारिज नहीं किया गया है. जांच चल रही है. संपत्ति के विवाद में उनकी जान जाने का अंदेशा जताया जा रहा है.
संत भय्यू जी महाराजतीन साल पहले 2018 में भय्यू जी महाराज ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी. भय्यू जी महाराज देश के जाने माने संत और कथावाचक थे. उनके निधन से भी देशभर में लोग चौंक गये थे. भय्यू जी महाराज एमपी सरकार में दर्जाधारी मंत्री थे. उनकी लाश के पास से ही पिस्टल और सुसाइड नोट बरामद किया गया था. इस मामले की भी सीबीआई से जांच कराने की मांग उठी थी.
संत बाबा राम सिंह पंजाब के इस संत ने पिछले साल 2020 में खुद को गोली मार ली थी. वे तीन कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर सिंघु बार्डर पर हो रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल थे. उन्होंने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था जिसमें किसानों की दुर्दशा से आहत होने और इसी के चलते खुदकुशी करने की बातें लिखी हुई थीं.
संत ज्ञानेश्वर की हुई थी हत्या साल 2006 में हुई संत ज्ञानेश्वर की हत्या से तो पूरा देश दहल गया था. प्रयागराज माघ मेले से अपने मठ लौट रहे संत ज्ञानेश्वर और उनके शिष्यों पर हंडिया इलाके में ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गयी थीं. संत समेत सात लोग मारे गये थे. हत्या का आरोप सुल्तानपुर के सोनू-मोनू भाईयों पर लगा. संत ज्ञानेश्वर पर सोनू-मोनू के पिता की हत्या का आरोप लगा था. मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.
दीनबंधु दास पर बम से हुआ था हमलाअयोध्या के हनुमानगढ़ी मदिर के गद्दीनशीन थे दीनबंधु दास. वैसे तो इन्होंने न आत्महत्या की और ना ही इनकी हत्या हुई थी लेकिन, मंदिर परिसर के भीतर ही इनकी हत्या का प्रयास हुआ था. बात साल 1989-90 की है. गद्दीनशीन दीनबंधु दास की गद्दी के नीचे ही किसी ने बम रख दिया था. उनके बैठते ही बम फट गया और दीनबंधु दास बुरी तरह घायल हो गये. हनुमानगढ़ी मंदिर में बम फटने की घटना से पूरा संत समाज हिल गया था. हालांकि दीनबंधु दास इलाज के बाद ठीक हो गये थे. बाद में इनकी स्वाभाविक मौत हुई.
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