Uttar Pradesh

ऐसा जानवर प्रेमी नहीं देखा होगा! सेवा के लिए छोड़ दी सरकारी नौकरी, अनोखी है सोनिया की कहानी

मेरठ में एक महिला का अनोखा सपना

मेरठ: प्रत्येक युवा का सपना होता है कि उनकी सरकारी नौकरी लग जाए, जिससे वह बेहतर भविष्य की तरफ कदम बढ़ा सकें, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां रहने वाली सोनिया ने बेजुबान एनिमल्स की सेवा करने के लिए सरकारी नौकरी को ही छोड़ दिया. पिछले कई सालों से लगातार अब वह इन्हीं एनिमल्स की सेवा में लगी हुई हैं।

सोनिया का बचपन से ही एनिमल्स के प्रति लगाव

लोकल 18 टीम से खास बातचीत करते हुए सोनिया ने बताया कि उन्हें बचपन से ही एनिमल्स के प्रति काफी लगाव है. ऐसे में चाहे स्ट्रीट डॉग हो या फिर विभिन्न प्रकार के एनिमल्स, अगर कहीं भी किसी बेजुबान को कोई चोट लग जाती थी, तो वह अपने पॉकेट मनी के माध्यम से उनका उपचार कराती थीं. इसके लिए उन्होंने अपने घर के सामने की पार्क में भी स्ट्रीट डॉग्स एनिमल्स का अस्थाई रूप से आशियाना बसा दिया. लेकिन इसका लोगों के द्वारा विरोध किया जाता है. ऐसे उन्होंने मेरठ में ही अब एक 500 गज की जमीन खरीदी है. अब दोनों जगह वह सेवा में लगी हुई हैं।

खुद भी हुई शिकार, लेकिन नहीं मानी हार

उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में स्ट्रीट डॉग्स का इलाज करते समय एक बार डॉग ने उन्हें काट भी लिया था, लेकिन उन्होंने फिर भी हार नहीं मानी. तब से वह लगातार इसी तरह से उनकी सेवा में लगी हुई हैं. वह बताती हैं कि उन्होंने भी सरकारी नौकरी के लिए एग्जाम दिए थे, जिसके माध्यम से वर्ष 2021 में सशस्त्र सीमा बल में उनका चयन हो गया.

ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद उन्होंने अपनी मां को एनिमल्स की सेवा की जिम्मेदारी सौंप दी, जिसको उनकी मां ने बखूबी निभाया. लेकिन उसके बावजूद भी उनका मन इन्हीं एनिमल्स की देख-रेख के लिए लगा रहता था. इसलिए वह अपनी सैलरी में से हर महीने इन डॉग्स की सेवा के लिए पैसे भेजती रहती थीं. साथ ही जब वह खुद छुट्टियों पर आती थीं, तब वह दिन-रात इन्हीं की सेवा में लगी रहती थीं.

जनवरी 2023 में छोड़ दी नौकरी

उन्होंने बताया कि नौकरी के दौरान भी एनिमल्स की सेवा में ही उनका मन रहता था. इसलिए उन्होंने सशस्त्र सीमा बल की नौकरी को वर्ष 2023 में छोड़ दिया. तब से लेकर अब तक वह लगातार इन एनिमल्स की सेवाओं में लगी हुई हैं. उन्होंने बताया कि जॉब के दौरान का जो भी पैसा एकत्रित हुआ है, वह उस पैसे और अन्य एनिमल्स लवर के द्वारा दिए गए दान के माध्यम इन एनिमल्स की सेवाओं में ही लगा दिया.

उन्होंने बताया कि बेजुबान एनिमल्स की सेवा करना भी समाज में एक बड़ी चुनौती होती है. ऐसे में जब उन्होंने स्ट्रीट डॉग की सेवा को करने के लिए कार्य शुरू किया, तो आस-पड़ोस के लोगों ने भी उन पर कमेंट करना शुरू कर दिया था. लोगों का कहना था कि दिनभर इन्हीं के सेवा में वह लगी रहती हैं. इससे अन्य लोगों के ऊपर भी असर पड़ेगा, लेकिन उसके बावजूद भी अपने कार्य में जुटी रहीं.

जगह-जगह से आती रहती है कॉल

सोनिया बताती हैं कि अगर उन्हें कोई भी सूचना मिलती है कि वहां पर स्ट्रीट डॉग्स या फिर अन्य एनिमल्स जख्मी हो गया है. वह तुरंत संबंधित एनिमल्स को अपने साथ घर ले आती हैं. इसके बाद अपने घर के सामने ही जो उन्होंने अस्थाई रूप से आशियाना बनाया है, वहां उन एनिमल्स को रखते हुए उनकी सेवा करते हुए दवाई खान-पान सबका विशेष रूप से ख्याल रखती हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास डॉग्स, बंदर, हॉर्स और गोवंश सहित हर तरह के एनिमल्स मौजूद हैं।

बताते चलें कि सोनिया का सपना है कि वह बेसहारा एनिमल्स के लिए भी एक अस्पताल बना सकें, जहां इनका उपचार हो सके. साथ ही एक ऐसा इनका अपना आशियाना हो, जहां यह सभी एनिमल्स रह सकें.

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