Uttar Pradesh

कृषि समाचार | पॉलीहाउस के बिना नursery | कृषि की खबरें | देसी जुगाड़ से पौध तैयार करने का तरीका |

पौधों की नर्सरी तैयार करने के लिए अब पॉलीहाउस की जरूरत नहीं है। बहराइच के अनुभवी माली खुशीराम यादव ने एक ऐसा अनोखा और सस्ता देसी जुगाड़ खोज निकाला है, जिससे कड़ाके की ठंड और बदलते मौसम में भी पौधे पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

फरवरी के महीने में मौसम में काफी उतार-चढ़ाव होता है। रात की ठंड और दिन की बढ़ती धूप की वजह से बिना पॉलीहाउस के बीजों का अंकुरण होना बहुत कठिन होता है। किसान अक्सर नर्सरी डाल तो देते हैं, लेकिन सही तापमान न मिल पाने की वजह से बीज सड़ जाते हैं या पौधे कमजोर रह जाते हैं। खुशीराम ने इसी मुश्किल को आसान बनाने के लिए एक प्राकृतिक तरीका खोज निकाला है।

खुशीराम बताते हैं कि पौधों की नर्सरी में सारा खेल ‘टेंपरेचर’ मेंटेन करने का होता है। उन्होंने बीज बोने के बाद क्यारियों के ऊपर सबसे पहले ‘ग्रीन नेट’ बिछाई और फिर उसके ऊपर ‘पुआल’ की एक परत डाल दी। इस तकनीक में ग्रीन नेट जमीन की ठंडक को रोककर तापमान को स्थिर रखता है, जबकि ऊपर बिछाई गई पुआल सूरज की किरणों की गर्मी को सोखकर उसे धीरे-धीरे मिट्टी के अंदर भेजती है। यह गर्मी रात भर जमीन में बनी रहती है, जिससे बीजों को अंकुरित होने के लिए एकदम सही माहौल मिल जाता है।

कम लागत में किसानों के लिए बड़ा मुनाफा यह तकनीक न केवल सस्ती है, बल्कि इसे इस्तेमाल करना भी बेहद आसान है। खुशीराम की सलाह है कि किसान विपरीत मौसम में पौधों को बचाने के लिए इस तरीके को अपना सकते हैं। इससे पौधों के खराब होने का खतरा कम हो जाता है और समय पर अच्छी पौध तैयार होने से बाजार में उसे बेचकर किसान मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। अगर आप भी नर्सरी के काम में नए हैं या लागत कम करना चाहते हैं, तो खुशीराम जी का यह ‘पुआल और नेट’ वाला फार्मूला आपके बहुत काम आ सकता है।

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