Last Updated:January 29, 2026, 04:07 ISTRain Effect Crops : उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश देखने को मिली है. इस बारिश से गेहूं किसानों के चेहरे खिल गए हैं, लेकिन सरसों और आलू के किसान परेशान हैं. हालांकि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. अगर सही तरीका अपनाया जाए तो फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है. इस समय गेहूं की फसल टिलरिंग और बाल निकलने की अवस्था में है. ऐसे में हल्की से मध्यम बारिश गेहूं के लिए वरदान है. इससे खेतों में नमी बनी रहती है, पौधों की जड़ों को पर्याप्त पानी मिलता है. दानों के विकास में तेजी आती है. रायबरेली. बीती रात हुई बारिश ने रायबरेली के किसानों की चिंता और राहत दोनों बढ़ा दी है. जहां यह बारिश गेहूं की फसल के लिए संजीवनी साबित हो रही है, सरसों और आलू की फसलों के लिए इसे नुकसानदायक माना जा रहा है. मौसम में आए इस अचानक बदलाव से खेतों में खड़ी फसलों पर अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है. रायबरेली जिले के सहायक विकास अधिकारी कृषि दिलीप कुमार सोनी लोकल 18 से बताते हैं कि बीती रात से शुरू हुआ रुक-रुककर बारिश का सिलसिला गेहूं की फसल के लिए एक तरह से संजीवनी का काम कर रहा है, लेकिन आलू और सरसों के लिए किसी घातक बीमारी से कम नहीं है. इस समय गेहूं की फसल टिलरिंग और बाल निकलने की अवस्था में है. ऐसे में हल्की से मध्यम बारिश गेहूं के लिए बेहद लाभकारी है. इससे खेतों में नमी बनी रहती है, पौधों की जड़ों को पर्याप्त पानी मिलता है और दानों के विकास में तेजी आती है. जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां यह बारिश किसानों के लिए वरदान जैसी साबित हुई है.
झड़ने लगेंगे फूल
हालांकि, सरसों की फसल के लिए यह बारिश परेशानी का कारण बन सकती है. इस समय सरसों में फूल और फलियां बनने की अवस्था चल रही है. लगातार नमी रहने से फूल झड़ने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है. अधिक नमी के कारण रोग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है. कुछ किसानों ने बताया कि बारिश के बाद खेतों में कीचड़ होने से सरसों की फसल कमजोर पड़ने का खतरा है.
खराब हो सकता है कंद
आलू की फसल पर भी बारिश का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. दिलीप कुमार सोनी के मुताबिक, अधिक नमी होने से आलू की फसल में झुलसा रोग और सड़न की समस्या बढ़ सकती है. खेतों में जलभराव होने पर कंद खराब होने की आशंका रहती है. यदि अगले कुछ दिनों तक धूप नहीं निकली और नमी बनी रही, तो आलू उत्पादक किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है. दिलीप कुमार सोनी का कहना है कि बारिश के बाद खेतों से पानी की निकासी सुनिश्चित करें, ताकि जलभराव न हो. सरसों और आलू की फसल में रोग से बचाव के लिए समय पर दवा का छिड़काव किया जाए. गेहूं की फसल में इस नमी का सही लाभ उठाने के लिए संतुलित उर्वरक का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Rae Bareli,Uttar PradeshFirst Published :January 29, 2026, 04:07 ISThomeagricultureगेहूं के लिए संजीवनी है बारिश, आलू-सरसों के लिए आफत, किसान बरतें ये सावधानी

