कानपुर में गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था शुरू
कानपुर: जिले की गौशालाओं में पहली बार ऐसी व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे अब किसी भी गौवंश की हालत छिपाई नहीं जा सकेगी. अक्सर देखा गया है कि कागजों में सब कुछ ठीक बताया जाता है, लेकिन हकीकत अलग निकलती है. जब अधिकारी अचानक निरीक्षण करते हैं, तब कई कमियां सामने आती हैं. अब इन सब पर ब्रेक लगाने के लिए प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू कर दी है. कानपुर की सभी ग्राम पंचायतों की गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, ताकि चौबीसों घंटे उनकी निगरानी हो सके.
सीडीओ दीक्षा जैन की पहल पर यह काम तेजी से शुरू हो चुका है और पांच गौशालाओं में कैमरे इंस्टाल भी कर दिए गए हैं. इससे गौशाला में मौजूद हर गौवंश पर लगातार नजर रखी जा सकेगी. कौन सा पशु बीमार है, किसकी देखभाल नहीं हो रही, किस समय चारा डाला गया, सब कुछ कैमरे की निगाह में रहेगा. गौशाला में काम कर रहे कर्मचारियों को अब पूरी जिम्मेदारी से काम करना होगा, क्योंकि हर गतिविधि रिकॉर्ड होती रहेगी.
प्रशासन का मानना है कि सीसीटीवी से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि बीमार या कमजोर गौवंश की पहचान भी मिनटों में हो सकेगी. पहले कई बार सूचना मिलने में देरी होती थी, जिससे इलाज भी देर से शुरू हो पाता था. अब जैसे ही फुटेज में किसी पशु की हालत बिगड़ती दिखेगी, तुरंत अधिकारी तक सूचना पहुंच जाएगी और समय रहते इलाज कराया जा सकेगा. इससे गौवंश की सुरक्षा और देखभाल दोनों मजबूत होंगी.
सीएसआर फंड और पंचायत बजट से हो रही व्यवस्था
सीडीओ दीक्षा जैन ने बताया कि सरकार और सीएम ऑफिस से गौशालाओं के बेहतर संचालन को लेकर लगातार निर्देश मिलते रहते हैं. इसी कड़ी में पहली बार सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस पूरे काम में सीएसआर फंड और ग्राम पंचायत के बजट का इस्तेमाल किया जा रहा है. सीडीओ ने कहा कि फुटेज को समय-समय पर अफसरों और बीडीओ स्तर पर भी चेक किया जाएगा. अगर कहीं लापरवाही मिली, चारा समय पर नहीं डाला गया या गौवंश की साफ-सफाई में कमी पाई गई तो जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई तय है.
बेहतर देखभाल, ज्यादा पारदर्शिता
अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से गौशालाओं की दशा में बड़ा सुधार आएगा. पहले निरीक्षण के समय ही कमियां पकड़ में आती थीं, लेकिन अब 24 घंटे निगरानी होगी. कर्मचारियों को भी अपना काम समय से करना होगा, क्योंकि कैमरे हर गतिविधि का सटीक प्रमाण बनेंगे. गांवों में बने गौ-आश्रयों में यह तकनीक लागू होने से प्रशासन का काम भी आसान होगा और गौवंश की देखभाल भी बेहतर होगी.

