चित्रकूट में बंदरों के आतंक से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है. वर्षों से मठ–मंदिरों, बाजारों और घनी आबादी वाले ग्रामीण इलाकों में बंदरों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई थी. रोजाना छतों से कपड़े उठा ले जाना, खेतों में फसल बर्बाद करना, दुकानों से सामान छीन लेना और राह चलते लोगों पर झपट्टा मारना आम बात हो गई थी.
अब इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए चित्रकूट में वन विभाग ने एक अनोखी पहल शुरू की है. इस पहल के तहत बंदरों को पकड़कर सुरक्षित रूप से जंगलों में छोड़ा जाएगा. खास बात यह है कि इसके लिए बाहरी टीम पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्थानीय युवाओं को ही प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि यह अभियान स्थायी और प्रभावी बन सके.
मथुरा से विशेषज्ञ टीम चित्रकूट पहुंच चुकी है, जो गांव-गांव जाकर चयनित लोगों को बंदर पकड़ने की वैज्ञानिक और सुरक्षित तकनीक सिखाएगी. प्रत्येक प्रभावित ग्राम पंचायत से ग्राम प्रधान दो लोगों को नामित करेंगे. इन दोनों व्यक्तियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण के दौरान उन्हें यह बताया जाएगा कि किस प्रकार बिना किसी क्रूरता के बंदरों को जाल या पिंजरे के माध्यम से पकड़ा जाए और कैसे खुद को सुरक्षित रखा जाए.
प्रसिद्धपुर गांव में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है. आगे अन्य ग्राम पंचायतों में भी इसे विस्तारित किया जाएगा. वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि जब भी बंदर पकड़ने का विशेष अभियान चलेगा, तो प्रशिक्षित स्थानीय लोग वन विभाग की टीम के साथ सक्रिय भूमिका निभाएंगे. प्रत्येक बंदर पकड़ने पर उन्हें निर्धारित धनराशि दी जाएगी, इससे न केवल समस्या का समाधान होगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए एक नया रोजगार अवसर भी तैयार होगा.
विभाग ने जिलाधिकारी के माध्यम से अतिरिक्त बजट की मांग भी की है, ताकि इस कार्य में जुड़े लोगों को उचित पैसा भी दिया जा सके. वन विभाग की टीम पकड़े गए बंदरों को विशेष वाहनों से सुरक्षित जंगल क्षेत्रों में छोड़ेगी, जहां उनका प्राकृतिक आवास है. साथ ही गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, लोगों से अपील की जाएगी कि वे बंदरों को खाने-पीने की सामग्री न दें. जब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से भोजन मिलना बंद होगा तो बंदर स्वत जंगलों की ओर अपना रुख कर लेंगे.

