रामपुर में आजम खान के संदेश के बाद सपा नेता युसूफ मलिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज
रामपुर: समाजवादी पार्टी के नेता युसूफ मलिक ने हाल ही में फर्जी पैन कार्ड मामले में जेल में बंद आजम खान से मुलाकात के बाद लोगों को संदेश दिया था कि ईरान में हुए हमले में वहां के जिन आम नागरिकों ने जान गंवाई, उनकी मौत पर अफसोस जताते हुए आजम खान ने मुसलमानों से ईद पर काले कपड़े पहनने की अपील की है. लेकिन अब यह संदेश झूठा बताया जा रहा है और यूपी पुलिस ने सपा नेता के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर ली है. रामपुर थाने में युसूफ मलिक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है.
युसूफ मलिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद, यह सवाल उठ रहा है कि भारतीय दंड संहिता में इसका क्या नियम है. आइए जानते हैं कि भारतीय दंड संहिता में इसका क्या नियम है और क्या हो सकती है युसूफ मलिक की कार्रवाई.
युसूफ मलिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद, यह सवाल उठ रहा है कि भारतीय दंड संहिता में इसका क्या नियम है. भारतीय न्याय संहिता के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जेल में बंद किसी आरोपी का नाम लेकर लोगों तक उसका पैगाम या बयान पहुंचाता है और उससे गलत, भड़काऊ या भ्रामक संदेश फैलता है, तो परिस्थितियों के अनुसार उसके खिलाफ कई तरह की कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई का प्रावधानअगर संदेश झूठा या भ्रामक साबित होता है, तो पुलिस भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर सकती है. उस शख्स के खिलाफ BNS की धारा 353/356 जैसे प्रावधान (अफवाह या गलत सूचना फैलाना) लागू हो सकते हैं. इससे समाज में भ्रम या तनाव फैलने की स्थिति बनती है तो मामला गंभीर माना जाता है.
शांति भंग की आशंका में कार्रवाईवहीं यदि संदेश से धार्मिक या सामाजिक तनाव फैलने की आशंका हो, तो पुलिस भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भी कार्रवाई कर सकती है. शांति भंग की आशंका में धारा पुलिस शख्स के खिलाफ 107/116 CrPC के तहत कार्रवाई कर सकती है. जरूरत पड़ने पर पुलिस उसे गिरफ्तार भी कर सकती है.
जेल नियमों का उल्लंघन जिस शख्स ने ऐसा कार्य किया है और जेल में बंद कैदी के संदेश को बिना अनुमति बाहर फैलाता है, तो यह जेल नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है. जेल प्रशासन जांच कर सकता है कि मुलाकात के दौरान क्या नियम तोड़े गए. अगर जानबूझकर संदेश बाहर पहुंचाया गया हो, तो संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई संभव है. अगर आरोपी के नाम से झूठा बयान फैलाया गया हो, तो उस पर मानहानि का केस भी दर्ज हो सकता है.
कैदी से मुलाकात के दौरान नियमों का पालन जरूरीहालांकि प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जेल में बंद कैदियों से मुलाकात के दौरान कुछ तय नियमों का पालन करना होता है और किसी भी तरह का संदेश सार्वजनिक करना जांच का विषय बन सकता है. फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि क्या आजम खान का संदेश बाहर लाने वाले युसूफ मलिक के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है या नहीं.
इस मामले की जांच जारी है और जल्द ही इसके बारे में और जानकारी सामने आ सकती है.

