चैत्र नवरात्रि 2026: माता का आगमन डोली पर हो रहा है, जो अशुभ संकेत माना जा रहा है. आइए जानते हैं कि डोली के आगमन से क्या बदलाव आ सकते हैं और कैसे आप अपने जीवन में शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं.
चैत्र नवरात्रि में मां के आगमन से नए साल की शुरुआत होती है. मां का आगमन तय करता है कि कैसा फल मिलेगा. इस बार मां दुर्गा डोली से आ रही हैं, और उनका आगमन डोली पर हो रहा है. डोली पर मां के आगमन से कई अशुभ फल मिलता है, जैसे कि राजनीति में उथल-पुथल मचती है और कई संभावित आपदा से जुड़ी समस्याएं भी जागृत होती हैं।
पं. अनुपम महाराज ने बताया कि नवरात्रि का प्रारंभ इस बार 19 मार्च को हो रहा है, और इस नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि कहा जाता है. कहते हैं कि इस दिन ब्रह्मा ने सृष्टि का प्रारंभ किया था. सनातनियों और वेद पुराण को मानने वालों के लिए यह सम्मसर का पहला दिन होता है. यह नवरात्रि संपूर्ण 9 रात्रि वाला होगा, और पहले दिन मां डोली पर सवार होकर आएंगी. मां के डोली पर आने का संकेत शुभ नहीं माना जाता है, और माना जाता है कि यदि मां डोली पर आती हैं, तो राजनीति में उथल-पुथल होता है, अस्थिरता होगी, और एक देश का दूसरे देश के साथ विवाद भी होगा।
हाथी से है मां का आगमन
पं. अनुपम महाराज ने बताया कि भगवती का आगमन हाथी पर है, जो शुभ संकेत माना जाता है. इससे शांति भी बन सकती है. नवरात्रि में भगवती का कलश स्थापना 19 मार्च को किया जाएगा, और कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त 11.55 से 12.40 तक शुभ है. सुबह 6.40 से 9.32 तक का समय उत्तम माना गया है. मां का नव रात्रि पूजन, कलश स्थापना, अखंड ज्योति, दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा 32 नाम का पाठ, नवाड मंत्र का जाप, दुर्गा चालीसा, मां विंध्यावासिनी चालीसा, दुर्गा स्त्रोत्तर के साथ ही देवी के अन्य नामों का जाप करें. पूजन-पाठ और स्तुति करने का भी विधान है.
ये है पारण का समय
पं. अनुपम महाराज ने बताया कि नवरात्रि में मां के नौ रूप हैं, जिनमें भगवती के अलग-अलग रूप, पुष्प और भोग हैं. भगवती के 9 रूपों का पूजन करने से मां की असीम अनुकंपा बनती है. 19 से शुरू होने के बाद 27 मार्च 12.22 मिनट के बाद पुनर्वषु मुहूर्त में व्रत का पारण कर सकते हैं. नवरात्रि में मां की अलग-अलग तरीके से पूजा और अर्चना की जाती है, जिसके अलग-अलग फल मिलते हैं. ऐसे में अपने स्वेच्छा व शक्ति के अनुसार इसे कर सकते हैं।
नवरात्रि में मां के आगमन से नए साल की शुरुआत होती है, और मां का आगमन तय करता है कि कैसा फल मिलेगा. इस बार मां दुर्गा डोली से आ रही हैं, और उनका आगमन डोली पर हो रहा है. डोली पर मां के आगमन से कई अशुभ फल मिलता है, जैसे कि राजनीति में उथल-पुथल मचती है और कई संभावित आपदा से जुड़ी समस्याएं भी जागृत होती हैं.

