Uttar Pradesh

ब्रोकली की फसल में लग रहे रोग! किसान परेशान ना हों, लहसुन-खैनी के इस देसी जुगाड़ का करें छिड़काव

कौशाम्बी: ब्रोकली की फसल इन दिनों फूल की अवस्था में है. फूलों की अवस्था में फसलों में रोग लगना शुरू हो जाता है, तो किसान की फसल बर्बाद हो जाती है. किसान फसल को रोग से बचाने के लिए कीटनाशक दावों के साथ घरेलू उपाय से भी अपनी फसलों को सुरक्षित बचा सकता है. घरेलू उपाय से फसल को बचाने के लिए सुखी खैनी और लहसुन का पेस्ट घरों मे तैयार करें.

इस दवा को तैयार करने के लिए खैनी और लहसुन को कूटकर एक हफ्तों के लिए ड्रम में भरकर रख दें. जब तक पूरी तरह से लहसुन और खैनी का अंश पानी न छोड़ दे, तब तक उसे ड्रम मे रखा रहने दें. यह प्रक्रिया कम से कम एक हफ्तों मे पूर्ण हो जाती है. जब भी पेस्ट को बाहर निकालें, तो उसमें आवश्यकता अनुसार पानी का गोल मिलाकर मिश्रण कर लें और पूरी फसलों में स्प्रे कर दें. इससे कीट भी मर जाएंगे और फसल भी सुरक्षित हो जाएगी.

ऐसे पौधे का करें बचावब्रोकली की फसल में अधिकतर तीन प्रकार के रोग लगते हैं, जैसे माहू रोग जिसे मच्छर जैसे दिखते हैं, वह फूलों पर इकट्ठा हो जाते हैं. ब्रोकली की फसल में अधिक ठंड होने के कारण यह रोग लगता है. दूसरा पत्ता लपेट रोग होता है. अगर इन रोगों को दवाओं के माध्यम से बचाना चाहते हैं, तो उसके लिए कृषि बीज गोदाम से डाइथेन एम 45 दवा का इस्तेमाल कर फसल को बचा सकते हैं.

तीसरा रोग फसल में पाउडर जैसा रोग लगता है, जो पत्तियों को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है और फसल की बढ़त को भी रोक देता है. ऐसे में किसान मैनकोजेब 75% या कार्बेन्डाजिम फफूंदीक नाशक दवा को भी इस्तेमाल करके फसल में लगने वाले रोग की रोकथाम कर सकते हैं.

फसलों की हमेशा करें देख-रेखकिसान शिव प्रसाद मौर्य ने बताया कि ब्रोकली की फसल में अधिक गर्मी पड़ने के कारण फफूंदी जनक रोग लगने लगते हैं, जिसके कारण फसल मे पत्तियां गिरने लगती हैं और पौधे सड़कर गिरने लगते हैं. अगर पौधे सड़ना शुरू हुए, तो यह असर धीरे-धीरे पूरी फसल में फैल जाता है, जिसके कारण पूरी फसल बर्बाद होना शुरू हो जाती है. ऐसे में किसान को अपनी फसलों की हमेशा देख-रेख करना चाहिए.

कीटनाशक दवाओं का बनाएं घोलइस रोग की पहचान करने के लिए पौधों में पत्तियां पीली और झलसने लगती हैं. इस तरह से किसान को काफी नुकसान भी हो जाता है. अगर इस प्रकार के फसल में रोग लगते हैं, तो सबसे पहले कृषि बीज गोदाम से फफूंद नाशक और कीटनाशक दवाओं का घोल बनाकर फसलों पर स्प्रे कर दें. इसके साथ-साथ अगर घरेलू उपाय से भी रोग को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो उसके लिए किसान शिव प्रसाद मौर्य ने बताया कि लहसुन हल्का-हल्का कूटकर उसका पेस्ट बना लें और उसमें नीम का तेल और गुड़ मिश्रण करके एक ड्रम में भरकर इसको रख दें और कुछ दिन के लिए छोड़ दें. जब इसका अर्क पूरी तरह से बाहर निकल जाए, तो इसे छानकर स्प्रे कर दें, ताकि पौधों के रोगों को यह नियंत्रित कर सके और सड़ रही फसलों को बचाया जा सके.

ठंड के समय होती है बुआईकृषि अधिकारी भगवती प्रसाद ने बताया कि इस समय गर्मी के कारण तापमान बढ़ता जा रहा है और ब्रोकली की फसल ठंड मौसम की होती है, क्योंकि ब्रोकली की फसल की बुआई जनवरी से फरवरी के महीने में कर देते हैं. इस समय ठंड का मौसम होता है और फसल मार्च से लेकर अप्रैल में निकलना शुरू हो जाती है. जब भी ब्रोकली में फूल निकलना शुरू होता है, तो उसमें रोग भी लगना शुरू हो जाता है. जब तापमान बढ़ता है तो रोग भी लगना शुरू हो जाते हैं.

ब्रोकली की फसल में लगने वाला रोग जिसे गांव की भाषा में माहू रोग कहा जाता है, यह रोग मच्छरों की तरह होता है. पूरी फसल काले-काले मच्छर फैल जाते हैं और यह फसल को बर्बाद कर देते हैं. दूसरा पत्ता लपेटा एक किट होता है, जो पत्तियों को नष्ट कर देता है. इन सब रोग के लिए डाइथेन एम 45 दवा का 1ML प्रति लीटर के हिसाब से घोल बनाकर खेतों में छिड़काव कर सकते हैं. हल्का-हल्का पाउडर के जैसे दिखने लगता रोग किसी भी प्रकार का खून नाशक दवा जैसे मैनकोजेब 75% या कार्बेन्डाजिम दवा से नष्ट हो जाता है. 1.5 ग्राम प्रति लीटर घोल मिलाकर फसल में छिड़काव कर सकते हैं. यह रोगों से फसल का बचाव कर सकता है.

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