गोरखपुर का राजघाट अब बनारस जैसी खूबसूरती लिए हुए है. राप्ती नदी के किनारे स्थित राजघाट का सुंदरीकरण होने के बाद यह जगह बिल्कुल नए अंदाज में नजर आ रहा है. चौड़ी सीढ़ियां, आकर्षक गुंबद और साफ-सुथरा परिसर यहां आने वालों को खास अनुभव देते हैं. शाम के समय ठंडी हवा, परिवार और बच्चों की मौजूदगी इसे और जीवंत बनाती है, वहीं कलाकार और कंटेंट क्रिएटर्स भी इसे अपनी पसंदीदा जगह मान रहे हैं.
गोरखपुर एक धार्मिक और सांस्कृतिक शहर है, जहां घाटों की चर्चा होते ही सबसे पहले वाराणसी का नाम सामने आता है. लेकिन अब गोरखपुर में भी एक ऐसा घाट तैयार हो गया है जो बनारस की तर्ज पर लोगों को आकर्षित कर रहा है. राप्ती नदी के किनारे स्थित राजघाट इन दिनों सुंदरीकरण के बाद बिल्कुल नए अंदाज में नजर आ रहा है. राप्ती नदी के बीच बहते पानी और दोनों किनारों पर बने खूबसूरत घाट इस जगह की पहचान बनते जा रहे हैं. खास बात यह है कि यहां एक तरफ अंतिम संस्कार के लिए चिता जलती है, तो दूसरी तरफ लोग शाम के समय टहलते बैठते और नदी किनारे की ठंडी हवा का आनंद लेते दिखाई देते हैं.
शाम होते ही राजघाट की रौनक बढ़ जाती है. नदी किनारे बनी चौड़ी सीढ़ियों पर लोग बैठकर सुकून के पल बिताते हैं. कई परिवार यहां बच्चों के साथ घूमने आते हैं, तो कुछ लोग रोजाना की तरह मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक के लिए भी पहुंचते हैं. बच्चों के लिए भी यह जगह किसी पार्क से कम नहीं है. खुले घाट और खाली जगह होने के कारण बच्चे यहां खेलते-कूदते नजर आते हैं.
राजघाट की बनावट को भी खास तरीके से डिजाइन किया गया है, चौड़ी और मजबूत सीढ़ियां, किनारों पर बने खूबसूरत गुंबद और साफ-सुथरा परिसर, इस जगह को और आकर्षक बनाते हैं. घाट की वास्तुकला ऐसी है कि यहां आने वाले लोग फोटो खींचने से खुद को रोक नहीं पाते. राजघाट अब सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय कलाकारों और कंटेंट क्रिएटर्स की भी पसंदीदा जगह बनता जा रहा है. कई लोकल सिंगर यहां अपने गानों की शूटिंग करते नजर आते हैं, जबकि ब्लॉगर और यूट्यूबर भी यहां आकर वीडियो और व्लॉग बनाते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि, राजघाट का सुंदरीकरण होने से यह जगह अब पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत और व्यवस्थित हो गई है. शाम के समय यहां की ठंडी हवा नदी का शांत दृश्य और घाट की रोशनी लोगों को खास अनुभव देती है.

