मार्च की गर्मी से गेहूं की फसल को कीटों से बचाव के लिए किसानों को अलर्ट
मार्च में बढ़ते तापमान का असर आजमगढ़ में गेहूं की फसल पर दिखने लगा है. गर्मी के कारण बालियां समय से पहले पक रही हैं और रस चूसने वाले कीटों का प्रकोप भी बढ़ रहा है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय पर निगरानी, दवा का छिड़काव और हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.
आजमगढ़ में किसान बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती करते है, इन दिनों खेतों में गेहूं की फसल लहलहाने लगी है, यह मौसम गेहूं की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि बढ़ते तापमान का असर गेहूं की फसल पर भी प्रभावी रूप से देखने को मिल रहा है. मार्च के महीने में औसत से अधिक तापमान बढ़ने के कारण गेहूं की फसलें भी प्रभावित हो रही है, जहां गेहूं की बालियां समय से पहले पकाने लग रही हैं.
वहीं कुछ कीटों का प्रकोप भी इस दौरान बढ़ जाता है. अधिक तापमान के कारण बालियां पूरी तरह से बढ़ने की बजाय असमय पकने लगती है, जिससे पैदावार प्रभावित होती है. वही अधिक तापमान के कारण गेहूं की फसलों पर कुछ खतरनाक कीटों का असर भी बढ़ जाता है, जो फसल को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाते हैं. इस दौरान रस चूसने वाले कीट बेहद प्रभावित हो जाते हैं, जिससे पौधों की पत्तियों और जड़ों पर इसका असर दिखाई देता है.
इन कीटों का प्रकोप जब पौधों पर अधिक हो जाता है, तब पत्तियों से हरापन खत्म हो जाता है और पौधे पीले दिखाई देने लगते हैं. ऐसे में समय रहते इन कीटों से फसल का बचाव बेहद आवश्यक हो जाता है. कृषि एक्सपर्ट डॉ. राकेश पांडे बताते हैं कि कीटों से फसलों का बचाव करना बेहद आवश्यक होता है. किसानों को चाहिए कि वह खेतों की समय पर निगरानी करते रहें, जिससे आवश्यकता पड़ने पर कीटों से बचने के लिए जरूरी उपाय किए जा सके.
कीटों से फसल को बचाने के लिए किसानों को समय पर फसल में इंसेक्टिसाइड का छिड़काव बेहद आवश्यक हो जाता है. किसान इसके लिए इमिडाक्लो प्राइड या डाइमेथोएट नामक दवा का छिड़काव कर सकते हैं. इन्हें 500 लीटर पानी में 375 एमएल की मात्रा में मिलाकर प्रति हेक्टेयर में इसका छिड़काव किया जा सकता है.
कृषि एक्सपर्ट बताते हैं कि इन दवाइयों के छिड़काव का समय भी बेहद महत्वपूर्ण होता है. प्रभावी रूप से उपयोग करने के लिए इन दवाओं का छिड़काव किसान भाइयों को सुबह या शाम के समय में करना ज्यादा लाभदायक हो सकता है. ऐसे में फसल को कीटों से बचने के लिए किसानों को अपने खेतों में समय पर दवाइयों का छिड़काव करते हुए फसल को सुरक्षित कर सकते हें.
इसके अलावा तापमान को नियंत्रित करने के लिए भी गेहूं की फसल में हल्की सिंचाई की जा सकती है, ऐसे में यदि किसान चाहे तो वह अपनी फसल की सुबह या शाम के समय में हल्की सिंचाई करते हुए मिट्टी के तापमान को नियंत्रित कर सकते हें. हल्की सिंचाई से मिट्टी में नमी बनी रहेगी जिससे बढ़ते तापमान का प्रभाव कम किया जा सकता है.

