पीलीभीत में ब्रिटिशकालीन डगा और कलीनगर पुल के बंद होने से करीब 50 गांव के लोगों और पर्यटकों को भारी परेशानी हो रही है. इन पुलों का निर्माण 1920-25 के बीच हुआ था, जो अब अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं और जर्जर हो गए हैं. प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इन्हें बंद कर दिया है, जिससे खटीमा जाने वाले लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है. पीलीभीत टाइगर रिजर्व के मुस्तफाबाद गेट और चूका बीच जाने वाले पर्यटक भी प्रभावित हैं, जिन्हें उबड़-खाबड़ और लंबे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है. वहीं पूर्णागिरी मेले के दौरान श्रद्धालुओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
इन पुलों की हालत खराब होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों और किसानों पर सबसे ज़्यादा मार पड़ी है. माधोटांडा क्षेत्र के किसानों को अपनी फसल मंडी ले जाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. छोटे वाहनों के लिए बने वैकल्पिक रास्ते कच्चे हैं, जो बारिश के दिनों में दलदल बन जाते हैं. एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को भी गांवों तक पहुँचने में अब पहले के मुकाबले अधिक समय लग रहा है.
इन पुलों के निर्माण की कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है, लेकिन इनके धरातल पर उतरने में खासा समय लगने की आशंका है. पीलीभीत माधोटांडा मार्ग पर स्थित एक और पुलिया भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने की कगार पर है, जो सड़क के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस पुल के निर्माण की मांग तेजी से उठ रही है, ताकि स्थानीय लोगों को मुश्किलों से निजात मिल सके.

