Uttar Pradesh

कौशांबी के किसान बनवारी लाल की आम की बागवानी से सालाना 5–6 लाख की कमाई | सफलता की कहानी

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के शाहजादपुर गांव के एक किसान बनवारी लाल ने आधुनिक तकनीकी खेती के जरिए बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने बागवानी और सब्जी उत्पादन में नई मिसाल पेश की है. बनवारी लाल ने खेती के क्षेत्र में नई सोच के साथ कदम बढ़ाया है और अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर बागवानी और सब्जी की खेती कर रहे हैं।

बनवारी लाल 1985 से बागवानी कर रहे हैं और पहले दूसरों की खेती पर मजदूरी करते थे. लेकिन अब बनवारी लाल किसी में अलग ही नाम कमा रहे हैं क्योंकि उन्होंने तकनीकी खेती करना शुरू कर दिया है. जिससे साल में 5 से 6 लाख का मुनाफा कमाते हैं. उन्होंने आम्रपाली, रेड सुंदरी, केसर, मल्लिका, अरूणिका प्रजाति की आम की बागवानी कर रहे हैं और लगभग 100 पौधे तैयार किए हैं जिनमें से अब तक लगभग 100 पौधे फल देना शुरू कर दिए हैं.

बनवारी लाल आम की बागवानी करने के बहुत ही शौकीन किसान माने जाते हैं क्योंकि उनके पास 28 जाति की पौधे तैयार किए हैं. विदेशी आम के फलों के बहुत ही ज्यादा शौकीन हैं क्योंकि इन फलों के पौधों को तैयार करने में कम लागत में अच्छा मुनाफा मिलता है. इन पौधों को लगाने के मात्र 6 महीने बाद ही फ्लोरिंग शुरू हो जाती है. सबसे अच्छा फल एक से दो सालों बाद पौधों में निकलता है जिसको बाजारों में बेचने के लायक होता है. इस तरह से किसान बनवारी लाल लगभग 28 प्रजातियों के आम के पौधे तैयार किए हैं।

सन 1985 से आम की बागवानी कर रहे बनवारी लाल ने बताया कि उन्होंने पहले परंपरागत तरीके से गेहूं और धान की खेती की थी. लेकिन अब उन्होंने आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर बागवानी और सब्जी की खेती कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें परंपरागत जैसे फलों की बागवानी करने के लिए एक जिज्ञासा चल रही थी क्योंकि उन्हें अलग से एक पहचान बनाने के लिए विदेशी फलों की बागवानी शुरू करनी थी. अब उनके पास 28 प्रकार की आम की प्रजातियां की पौधे तैयार हैं, जिनमें से अब तक लगभग 100 पौधे फल देना शुरू कर दिए हैं.

आम की बागवानी करने के लिए बनवारी लाल ने बताया कि सबसे पहले खेतों में 1 मीटर गहरा एवं 1 मीटर चौड़ा गहराई की गड्ढा तैयार किया जाता है. गड्ढा तैयार करते समय ऊपरी सतह की मिट्टी को अलग रख लिया जाता है और उसे मिट्टी को लगभग 15 से 20 दिनों तक बाहर रख दिया जाता है. जिसमें से धूप लगने के बाद उसमें कंपोजिट खाद बवेरिया बेशियाना, का मिश्रण करके खाद को निचे डाल दिया जाता है. उसके बाद पौधे कि रोपाई कर दी जाती है, फिर जो मिट्टी को पहले निकाला गया है उसे पहले ही नीचे डाल दिया जाता है. उसके बाद बीच वाली मिट्टी को डाला जाता है इस तरह से पौधे में जड़े मजबूत और अच्छी होती हैं और साथ ही पौधा जल्दी तैयार होता है. जब भी आम के पौधों में फूल निकलना शुरू हो जाए तो उसमें कीटनाशक दावों का जरूर इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि अगर कीटनाशक दावों का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो पौधों में निकलने वाले फूल झड़ना शुरू कर देते हैं और फलों की मात्रा कम हो जाती है. इससे किसान को काफी नुकसान भी हो जाता है, जब भी पौधे फूल निकलना शुरू कर दें तो पौधों पर ध्यान देना बहुत ही आवश्यक होता है. अगर थोड़ी सी भी गलती करते हैं तो पौधे में निकलने वाले फूल पूरी तरह से झड़ जाएंगे.

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