गोंडा की छात्रा वैष्णवी प्रजापति ने कम उम्र में ही मेहनत और हुनर की मिसाल बन गई है. वह पढ़ाई के साथ-साथ घर पर मिट्टी के कुल्हड़, दीये और बर्तन बनाकर बाजार में बेच रही है. पिता से सीखा यह काम अब छोटा सा बिजनेस बन चुका है, जिससे वह अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के साथ परिवार की भी मदद कर रही है.
वैष्णवी प्रजापति 6वीं की छात्रा है, जिन्होंने कुछ अलग करने की ठानी है. स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ वह घर पर मिट्टी से कुल्हड़ और अन्य सामान तैयार कर रही है. वैष्णवी अपने परिवार के साथ मिलकर मिट्टी गूंथती है और फिर उससे कुल्हड़, दीये और छोटे बर्तन बनाती है. तैयार सामान को पास के बाजार में बेचा जाता है. धीरे-धीरे लोगों को उसके बनाए कुल्हड़ पसंद आने लगे और मांग बढ़ गई. इस काम से उसे अच्छी आमदनी होने लगी है, इससे वह अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने में भी मदद कर रही है और परिवार का सहारा बन रही है.
वैष्णवी प्रजापति ने बताया कि बचपन से ही हमारे यहां मिट्टी का काम हो रहा था और हम बचपन से ही देखते आ रहे थे कि हमारे पिताजी मिट्टी के बर्तन तैयार कर रहे हैं तो बचपन से ही हम यह काम करने लगे और हमको को कुल्हड़ आइडिया हमारे पिताजी से मिला है. वैष्णवी प्रजापति ने बताया कि शुरू में जब हम कुल्हड़ बना रहे थे तो कुल्हड़ सही से नहीं बन पा रहा था. लेकिन हमने हर नहीं मानी और हमारे पिताजी ने बनाने में काफी मदद की और इस समय हम बिना सांचे के इलेक्ट्रॉनिक चाक पर मिट्टी का कुल्हड़ एक साइज का बना लेती हूं.
वैष्णवी प्रजापति ने बताया कि जब हम 7 साल के थे तब से हम मिट्टी का काम कर रही हूं और इस समय हम अपने हाथ से बिना किसी सांचे से एक ही साइज में मिट्टी के कुल्हड़ तैयार कर देता हूं. वैष्णवी प्रजापति ने बताया कि बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए हमने दो ऑटोमेटिक कुल्हड़ बनाने वाली मशीन भी लगा रखी हूं. इसे कुल्हड़ जल्दी बन जाते हैं और समय का बचत भी हो रहा है. वैष्णवी प्रजापति ने बताया कि एक दिन में लगभग 400 से 500 कुल्हड़ तैयार कर लेती हूं.
वैष्णवी प्रजापति ने बताया कि हमारे को कुल्हड़ बिक्री अभी गोंडा शहर में हो रहा है भविष्य में इसको और बड़ा करना है और पूरे प्रदेश में अपने कुल्हड़ की सप्लाई करना चाहती हूं. वैष्णवी ने बताया कि हम अपने इस बिजनेस को और आगे बढ़ना चाहते हैं और हम बैंक में जॉब करना चाहती हूं जॉब के साथ-साथ अपने इस पुष्टिनी बिजनेस को आगे ले जाना चाहती हूं.

