Uttar Pradesh

आम के पेड़ों से छड़ रहे हैं बौर, तो अपनाए ये आसान तरीका.. यकीन मानिए फलों से लद जाएगा पेड़

आम का सीजन शुरू हो गया है और आम के पेड़ों पर अब बौर लगने लगे हैं। आम के पौधों से बौर नीचे गिरने लगे हैं, जिससे बागवानों को चिंता होने लगी है। यदि आपने भी आम की बागवानी लगाई है और पौधों से बौर गिर रहे हैं, तो तुरंत छिड़काव शुरू कर दें। नहीं तो ऐसा हो सकता है कि आपकी पूरी बागवानी नष्ट हो जाए।

उद्यान अधिकारी की सलाह

लोकल 18 से बात करते हुए उद्यान अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष काफी अच्छी बौर दिखाई दे रही है। बागों में बौर अब परिपक्व होने की अवस्था में है, जिसका अर्थ है कि जल्द ही दाने पड़ने लगेंगे। अभी 15 से 20 दिनों तक सबसे पहले सुरक्षा के तौर पर उपचार करना चाहिए, ताकि पौधों में लगे बौर से ज्यादा से ज्यादा फल आ सकें। इस समय खर्रा रोग से बचाव के लिए फफूंदनाशी दवा और थ्रिप्स कीट के लिए कीटनाशक का छिड़काव जरूर करें।

आम के बौर पर दो बार करें दवाओं का छिड़काव

कीटनाशक दवाओं में घुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर, या 1 ग्राम प्रति लीटर, या यूडोक्लोरिपिड 2 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से तथा कार्बेन्डाजिम (विभिन्न कंपनियों का) 2 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से एक छिड़काव अभी कर दें। दूसरा छिड़काव 10 दिन बाद करें, जिससे आम की मंजरियों पर किसी भी फफूंदजनित बीमारी या खर्रा रोग का प्रभाव न पड़े।

एक बार पेड़ पर भूंंगा कीट और चींटियों की रोकथाम के लिए तने से लेकर ऊपर तक उसकी अच्छी तरह धुलाई कर दें, ताकि पेड़ पर कीड़े-मकोड़े न चढ़ सकें। तने से थोड़ा ऊपर पॉलीथिन की बाइंडिंग कर दें, जिससे नीचे से चढ़ने वाले कीट ऊपर न जा सकें। इसके अलावा तने पर लगभग दो फीट का घेरा बनाकर पुरानी ग्रीस या मोबिल का लेप भी लगा सकते हैं। इससे कीटों की रोकथाम में काफी मदद मिलती है। आम में लगने वाली गुजिया कीट भी इससे नियंत्रित होती है, जो फलों को काटकर या चूसकर नुकसान पहुंचाती है।

पोषण की कमी से नहीं आते आम के पौधों पर बौर

जिन पेड़ों पर अभी तक बौर नहीं आया है, उनमें इस साल बौर आने की संभावना कम होती है, क्योंकि आम में अल्टरनेट बियरिंग होती है, यानी एक साल के अंतर से फल आता है। जिन पेड़ों पर इस साल बौर नहीं आया है, उन पर संभवतः पिछले साल बौर आया होगा।

अगर किसी पेड़ पर दो-तीन साल से बौर नहीं आ रहा है, तो उसमें पोषण की कमी हो सकती है। इसलिए पौधों को समय पर पोषण देना जरूरी है। पोषण देने का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर होता है। इसके बाद फरवरी-मार्च या बरसात से पहले भी पोषण दिया जा सकता है।

पोषण के लिए क्या करें

पोषण के लिए माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे कॉपर, मैग्नीशियम, जिंक आदि का मिश्रण, साथ ही पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद, थोड़ी नीम की खली और थोड़ी फॉस्फेट मिलाकर साल में दो बार पौधों में डालें। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और दीमक लगने की समस्या भी कम होती है।

यदि पौधों में पानी दे रहे हैं तो जब तक केवल बौर है, तब तक पानी दे सकते हैं। लेकिन जब बौर में दाने लगना शुरू हो जाएं, तब पानी देना बंद कर दें। अन्यथा दाने गिरने लगेंगे और फल का नुकसान हो सकता है।

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