चित्रकूट की मांटी देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी पहचान बनाई और आज प्रेरणा कैंटीन चलाकर अन्य महिलाओं के लिए उदाहरण बन गई हैं। वह आज से करीब सात साल पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। शुरुआत में वह समूह की अन्य महिलाओं के साथ बैठकों में शामिल होती थीं और छोटे-छोटे कामों में सहयोग करती थीं। उस समय शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यही समूह एक दिन उनके जीवन की दिशा बदल देगा।
समूह के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा रहा था, जिसमें कैंटीन खोलने की योजना भी शामिल थी। जब समूह की ओर से महिलाओं को लोन देने की बात सामने आई, तो मांटी देवी ने हिम्मत दिखाते हुए आगे कदम बढ़ाया। उन्होंने एक लाख रुपये का लोन लिया और जिला अस्पताल परिसर में प्रेरणा कैंटीन की शुरुआत कर दी है। आज उनकी यह कैंटीन न केवल उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी है।
मांटी देवी ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह खुद का व्यवसाय संभालेंगी, लेकिन समूह के सहयोग और विश्वास ने उन्हें यह हिम्मत मिली है। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्हें न सिर्फ आर्थिक सहायता मिली, बल्कि आत्मविश्वास भी मिला है। अब वह अपने परिवार का भरण-पोषण खुद कर रही हैं और अपने बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।
उनका कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह एक महिला होकर कभी इस मुकाम तक पहुंच पाएंगी और खुद की एक कैंटीन चला पाएगी। उन्होंने बताया कि आज वह लगभग 3 सालों से ऊपर इस कैंटीन का संचालन कर रही हैं। चित्रकूट अब सिर्फ आस्था और आध्यात्म की नगरी ही नहीं रहा, बल्कि यहां की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी बनती जा रही हैं।
एक समय था जब यहां की महिलाओं को अशिक्षा और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित माना जाता था, लेकिन बदलते दौर के साथ अब तस्वीर बदल रही है। महिलाएं न सिर्फ जागरूक हुई हैं, बल्कि रोजगार के क्षेत्र में भी मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं।

