होमफोटोagriculture80 बकरियों से रोज 50 लीटर दूध, बच्चों से भी कमाई, जानें किसान का बिजनेस मॉडलLast Updated:March 04, 2026, 18:16 ISTProfitable Goat Farming: रामपुर के किसान अशोक पाल ने साबित कर दिया है कि अगर सही प्रबंधन हो, तो बकरी पालन किसी ‘एटीएम’ से कम नहीं है. कभी केवल घरेलू जरूरतों के लिए पशुपालन करने वाले अशोक आज 80 देशी नस्ल की बकरियों के जरिए सालाना लाखों की कमाई कर रहे हैं. रोजाना 50 लीटर दूध की बिक्री और मेमनों के व्यापार से होने वाला मुनाफा पारंपरिक खेती के मुकाबले कहीं ज्यादा आकर्षक साबित हो रहा है. कम लागत, खुले में चराई और समय पर टीकाकरण जैसे सरल उपायों ने कैसे एक साधारण किसान की जिंदगी बदल दी, देखिए रामपुर की ये खास खबर. पशुपालन हमेशा से ही भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है, लेकिन रामपुर के किसानों ने इसे एक प्रोफेशनल बिजनेस का रूप दे दिया है. यहां बकरी पालन अब केवल मजबूरी नहीं, बल्कि लाखों की कमाई का जरिया बन चुका है. रामपुर के किसान अशोक पाल ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही नस्ल और बेहतर प्रबंधन हो, तो बकरियां किसी भी बैंक खाते से ज्यादा तेजी से रिटर्न दे सकती हैं. कम जगह और कम चारे में पलने वाला यह जीव आज कई परिवारों के लिए खुशहाली का द्वार खोल रहा है. रामपुर के किसान अशोक पाल बताते हैं कि पशुपालन उनके परिवार का बहुत पुराना काम है. पहले इसे सिर्फ घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता था, लेकिन वक्त के साथ उन्होंने इसे व्यापार में बदल दिया. इस समय उनके पास 80 देशी नस्ल की बकरियां हैं. अशोक पाल का मानना है कि इस काम में मेहनत तो लगती है, लेकिन जो मुनाफा मिलता है, वह किसी भी दूसरी छोटी नौकरी या खेती से कहीं ज्यादा बेहतर और सुकून देने वाला है. रामपुर जिले के गांवों में इन दिनों पशुपालन की तरफ लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. यहां किसान गाय और भैंस के साथ-साथ अब बकरी पालकर घर बैठे मोटी कमाई कर रहे हैं. यह बिजनेस बहुत कम पूंजी से शुरू किया जा सकता है, इसलिए इसे गांव के लोग ‘गरीबों का एटीएम’ कहते हैं. इसका कारण यह है कि जब भी किसी परिवार को अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो वे तुरंत एक बकरी या उसका बच्चा बेचकर नकदी हासिल कर लेते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अशोक पाल बताते हैं कि उनकी 80 बकरियों से रोज करीब 50 लीटर दूध निकल जाता है. बाजार में एक लीटर बकरी का दूध 35 रुपये के आसपास आसानी से बिक जाता है. इस हिसाब से वे रोजाना लगभग 1,750 रुपये की बिक्री कर लेते हैं. हफ्ते भर का हिसाब देखें तो यह 12,000 रुपये से ज्यादा होता है, और महीने भर में सिर्फ दूध बेचकर ही उनकी आमदनी 50,000 रुपये के करीब पहुंच जाती है, जो कि एक सरकारी तनख्वाह के बराबर है. दूध के अलावा बकरियों के बच्चों की बिक्री मुनाफे को कई गुना बढ़ा देती है. अशोक पाल के अनुसार, एक बकरी हर 6 महीने में बच्चा देती है और एक साल का होने पर बच्चा बेचने लायक हो जाता है. एक स्वस्थ बच्चे की कीमत 8 से 10 हजार रुपये तक मिल जाती है. अगर बच्चे का वजन और कद-काठी अच्छी हो, तो दाम और भी ऊपर जाते हैं. साल भर में वे लगभग 35 से 40 बच्चे बेच देते हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये की एक्स्ट्रा इनकम हो जाती है. किसान का कहना है कि बकरी पालन में चारे पर खर्च बहुत कम है क्योंकि वे सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक बकरियों को खुले में चराते हैं. इससे उनका पेट प्राकृतिक रूप से भर जाता है. हालांकि, वे यह भी चेतावनी देते हैं कि इसमें लापरवाही बिल्कुल नहीं चलती. समय पर टीकाकरण, दवा और बाड़े की साफ-सफाई बहुत जरूरी है. अगर कोई बकरी बीमार दिखे, तो उसे तुरंत झुंड से अलग कर देना चाहिए ताकि संक्रमण दूसरे पशुओं तक न फैले. रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में बकरी का हाट बाजार बहुत आसानी से उपलब्ध है. किसानों को अपना माल बेचने के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ता. कई बार तो व्यापारी खुद गांव आकर बकरियों की खरीदारी कर लेते हैं. यही आसान मार्केट एक्सेस बकरी पालन को एक सुरक्षित निवेश बनाता है. जरूरत पड़ने पर पशु को तुरंत नगद में बदलना ही इस बिजनेस की सबसे बड़ी खूबी मानी जाती है. अगर दूध और बच्चों की कुल आमदनी को जोड़ दिया जाए, तो अशोक पाल साल भर में लाखों रुपये का टर्नओवर कर रहे हैं. सिर्फ दूध की बिक्री से सालाना लगभग 6 लाख रुपये की कमाई हो जाती है और बच्चों की बिक्री का मुनाफा इसमें चार चांद लगा देता है. खर्च और लेबर निकालने के बाद भी वे एक बड़ी राशि बचा लेते हैं. अशोक पाल कहते हैं कि अगर आप लगन और मेहनत से देखभाल करें, तो बकरी पालन सच में आपकी जिंदगी बदल सकता है.First Published :March 04, 2026, 18:16 IST
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