Uttar Pradesh

गन्ने की खेती | 2026 की सर्वश्रेष्ठ गन्ने की किस्म |

गन्ना किसानों के लिए एक नई उम्मीद को.शा. 13235 किस्म ने अपनी रिकॉर्ड पैदावार के साथ चर्चा का विषय बनी हुई है. इस किस्म को विशेष रूप से बसंतकालीन बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया है. गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस किस्म की विशेषताओं को उजागर करते हुए बताया है कि इसकी बुवाई 15 फरवरी से मार्च के बीच करने पर सबसे बेहतर टिलरिंग देखी जाती है. हालांकि, इसकी सफलता के लिए मानसून से पहले उर्वरक प्रबंधन और इसकी उभरी हुई ‘बड’ की सुरक्षा करना अनिवार्य है.

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए को.शा. 13235 किस्म उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है. विशेषकर बसंतकालीन बुवाई के लिए यह किस्म वैज्ञानिकों और किसानों की पहली पसंद बनी हुई है. जहां शरद काल में इसकी पैदावार सामान्य रहती है, वहीं फरवरी और मार्च में इसकी बुवाई करने पर किसान रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन ले रहे हैं. हाल ही में शाहजहांपुर के एक प्रगतिशील किसान ने इस किस्म से प्रति हेक्टेयर बेमिसाल पैदावार लेकर प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. सही प्रबंधन और समय पर देखरेख के साथ, यह किस्म गन्ना बेल्ट में किसानों की आय दोगुनी करने का सामर्थ्य रखती है.

गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक ने बताया कि को.शा. 13235 किस्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बसंतकालीन अनुकूलता है. किसान इसे 15 फरवरी से लेकर मार्च अंत तक लगा सकते हैं, फरवरी का महीना जा चुका है इसलिए अब आप मार्च में भी इसकी बुवाई कर सकते है. शरद काल में इसमें ‘टिलरिंग’ कम होती है, लेकिन बसंत में इसका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहता है. महत्वपूर्ण यह है कि उर्वरक प्रबंधन मानसून से पहले, यानी जून अंत तक पूर्ण कर लें. मानसून के दौरान यूरिया देने से बचें, क्योंकि इसकी उभरी हुई ‘बड’ काफी संवेदनशील होती है और स्प्राउटिंग का खतरा रहता है. उचित बंधाई और सही समय पर पोषण से आप इस किस्म से अधिकतम लाभ उठा सकते हैं.

को.शा. 13235 गन्ने की एक ऐसी उन्नत किस्म है जो बसंत ऋतु में बुवाई के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है. वैज्ञानिकों का सुझाव है कि 15 फरवरी के बाद और मार्च के महीने में इसकी बुवाई करना सबसे अधिक लाभदायक होता है. शरद काल की तुलना में बसंत काल में इस वैरायटी में बेहतर ‘टिलरिंग’ देखी जाती है, जिससे गन्ने की संख्या और वजन में बढ़ोतरी होती है. यह वैरायटी उन किसानों के लिए आदर्श है जो देरी से बुवाई करना चाहते हैं.

इस किस्म से भरपूर पैदावार लेने के लिए खाद का सही समय पर इस्तेमाल बेहद जरूरी है. किसानों को चाहिए कि बेसल डोज के बाद यूरिया की जो भी टॉप ड्रेसिंग करनी है, वह जून के अंत तक यानी मानसून आने से पहले समाप्त कर लें. मानसून के दौरान यूरिया देने से बचना चाहिए. क्योंकि इस वैरायटी की आंखें (Buds) कछुए की पीठ की तरह उभरी हुई होती हैं, इसलिए अधिक नमी और यूरिया से उनमें असमय स्प्राउटिंग शुरू हो सकती है.

गन्ने की ये किस्म देती है रिकॉर्ड पैदावार उचित देखरेख और समय पर बंधाई ही इस वैरायटी की सफलता की कुंजी है. शाहजहांपुर के एक किसान ने वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर पिछले वर्ष इस वैरायटी से 2635 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की शानदार पैदावार हासिल कर पूरे प्रदेश में मिसाल कायम की है. अगर किसान गन्ने के गिरने से बचाव के लिए समय पर बंधाई करें और जल निकासी का उचित प्रबंध रखें, तो को.शा. 13235 भविष्य में गन्ना उद्योग की रीढ़ साबित हो सकती है.

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