Uttar Pradesh

गर्मियों में पिल्लों पर मंडरा रहा खतरा! क्या है कैनाइन पार्वो वायरस और कैसे बचाएं जान? जानिए बचाव टिप्स को कैनाइन पार्वो वायरस से बचाव के लिए टिप्स जानने के लिए पढ़ें

गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पालतू कुत्तों में खतरनाक बीमारी फैलने लगती है

गर्मियों की शुरुआत होते ही पालतू कुत्तों, खासकर पिल्लों में एक गंभीर वायरल बीमारी तेजी से फैलने लगती है, जिसे पार्वो कहा जाता है. चिकित्सा भाषा में इसे कैनाइन पार्वो वायरस कहा जाता है. यह वायरस सीधे आंतों पर हमला करता है और शरीर को बेहद कमजोर कर देता है. समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।

पार्वो संक्रमण कैसे फैलता है

पार्वो संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित मल, गंदगी या वायरस से दूषित जगह के संपर्क में आने से फैलता है. गर्म मौसम में यह वायरस अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. स्ट्रीट डॉग्स में यह बीमारी अक्सर पाई जाती है, लेकिन पालतू पिल्लों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उनमें जोखिम अधिक रहता है।

पार्वो संक्रमण के शुरुआती लक्षण

पार्वो संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:

1. बीमारी की शुरुआत में पिल्ला सुस्त और गुमसुम हो जाता है.
2. खेलना बंद कर देता है.
3. खाना-पीना छोड़ देता है.
4. तेज उल्टियां शुरू हो जाती हैं.
5. पतला दस्त आने लगता है, जिसमें कई बार खून भी दिखता है.
6. तेजी से डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) बढ़ने के कारण स्थिति गंभीर हो सकती है।

पार्वो संक्रमण किन उम्र के कुत्तों में ज्यादा खतरा होता है

पशु चिकित्सक डॉ. मोनिका गुप्ता के अनुसार, यह बीमारी 45 दिन से लेकर लगभग डेढ़ साल तक की उम्र के कुत्तों में ज्यादा देखी जाती है. यदि उल्टी और दस्त के साथ खून दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. संक्रमण का चक्र लगभग 10 से 14 दिनों का होता है, जिसमें समय पर इलाज बेहद जरूरी है।

पार्वो संक्रमण की जांच और इलाज

पार्वो की पुष्टि के लिए विशेष टेस्ट किया जाता है, जो थोड़ा महंगा हो सकता है. हालांकि, लक्षण दिखते ही इलाज शुरू करना अधिक जरूरी है. पार्वो संक्रमण का इलाज करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित उपचारों का सुझाव देते हैं:

1. मुख्य उपचार ड्रिप और फ्लूइड थेरेपी है.
2. नसों के जरिए तरल पदार्थ चढ़ाकर डिहाइड्रेशन नियंत्रित किया जाता है.
3. आवश्यक दवाएं दी जाती हैं.
4. समय पर इलाज न मिलने पर मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है।

पार्वो संक्रमण से बचाव के उपाय

पार्वो संक्रमण से बचाव के लिए डॉ. गुप्ता के अनुसार, 45 दिन की उम्र के बाद पिल्लों को वजन के अनुसार डिवॉर्मिंग (कीड़े मारने की दवा) डॉक्टर की सलाह से दिलानी चाहिए. इसके एक सप्ताह बाद वैक्सीनेशन शुरू करना आवश्यक है. डॉ. गुप्ता ने बताया कि पार्वो संक्रमण से बचाव के लिए निम्नलिखित टीके लगवाने चाहिए:

1. DHPPI (5-इन-1)
2. 7-इन-1
3. 9-इन-1

ये टीके कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. शुरुआती डोज के बाद निर्धारित अंतराल पर टीका लगवाना और हर साल बूस्टर डोज देना अनिवार्य है. यदि फीमेल डॉग का टीकाकरण न हुआ हो, तो उसके बच्चों में संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है.

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