जौनपुर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ‘लखपति दीदी’ अभियान को तेजी से लागू किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत 72,286 महिलाओं को चरणबद्ध प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है। पहले चरण में 858 महिलाएं प्रशिक्षित होकर मास्टर ट्रेनर बन चुकी हैं, जो गांव-गांव जाकर अन्य महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, डेयरी और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ेंगी।
जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत “लखपति दीदी” अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना है। योजना के अंतर्गत जिले की 72 हजार 286 महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित कर उनकी आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले चरण में 858 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया जा चुका है। ये प्रशिक्षित महिलाएं अब मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाएंगी और गांव-गांव जाकर अन्य महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सहित विभिन्न स्वरोजगार के कार्यों में प्रशिक्षित करेंगी।
इस कार्यक्रम के तहत कुल 29 बैच बनाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक बैच में 30 महिलाएं शामिल की गई हैं। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को न केवल तकनीकी कौशल सिखाया जा रहा है, बल्कि उन्हें यह भी बताया जा रहा है कि बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार कर किस प्रकार अपनी आय को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही उन्हें वित्तीय प्रबंधन, बचत और समूह के माध्यम से व्यवसाय संचालन की भी जानकारी दी जा रही है।
जिले में वर्तमान समय में 18 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग पौने दो लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को बैंकिंग सुविधा, ऋण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ब्लॉक स्तर पर नए समूहों के गठन और पुराने समूहों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस अभियान से जुड़ सकें।
उपायुक्त एनआरएलएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि “लखपति दीदी” योजना का उद्देश्य महिलाओं को इस स्तर तक सक्षम बनाना है कि वे प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकें। इसके लिए उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जैसे सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, अगरबत्ती निर्माण, पापड़-बड़ी निर्माण आदि। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि परिवार और समाज में उनका सम्मान भी बढ़ेगा।
