Uttar Pradesh

धरोहर: दिल्ली की जामा मस्जिद की तर्ज पर बनी गोंडा की 250 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद

गोंडा जिले की एक ऐतिहासिक मस्जिद जामा मस्जिद करीब 250-300 साल पुरानी है, जिसका निर्माण शेख ललक दादा ने मुगल शैली में करवाया था. यह मस्जिद अपनी भव्य दीवारों, विशाल आंगन और ऐतिहासिक वास्तुकला के लिए जानी जाती है. गोंडा जिले के विकासखंड रुपईडीहा में एक ऐसी मस्जिद मौजूद है, जिसकी बनावट दिल्ली की प्रसिद्ध जामा मस्जिद से मिलती-जुलती बताई जाती है. यह मस्जिद करीब 250 से 300 वर्ष पुरानी है और आज भी अपनी भव्यता और ऐतिहासिक पहचान को संजोए हुए है. इस मस्जिद का नाम भी जामा मस्जिद है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान मौलाना नूरुद्दीन कासमी ने बताया कि इस मस्जिद का निर्माण शेख ललक दादा के द्वारा मुगल काल के दौरान करवाया गया था. लाल पत्थरों से बनी इस मस्जिद की ऊंची दीवारें, विशाल आंगन और मेहराबदार दरवाजे इसकी खास पहचान हैं. मस्जिद की वास्तुकला में उस दौर की कला और शिल्प साफ दिखाई देती है, जो इसे गोंडा की एक महत्वपूर्ण धरोहर बनाती है. माना जाता है कि इस जामा मस्जिद को बनाने के लिए किसी भी प्रकार के ईट का प्रयोग नहीं किया गया है. यह चूना पत्थर और अन्य सामग्रियों से बनाया गया है.

गोंडा के विशुनापुर के जामा मस्जिद का निर्माण लगभग ढाई सौ से 300 वर्ष पहले शेख ललक दादा के द्वारा कराया गया था. माना जाता है कि वह एक जमींदार थे और उन्होंने जामा मस्जिद के साथ-साथ 54 कुएं का निर्माण कराए थे और 54 बाग भी लगाए थे. माना जाता है कि गर्मी के समय में लोग बाग में विश्राम करते थे और कुएं से जल पिया करते थे. जामा मस्जिद के अध्यक्ष मौलाना नूरुद्दीन कासमी बताते हैं कि गोंडा जिला मुख्यालय से लगभग 35 से 40 किलोमीटर दूरी पर विशुनापुर गांव में सबसे पुरानी जामा मस्जिद स्थित है. माना जाता है कि यह जामा मस्जिद लगभग ढाई सौ से 300 वर्ष पुरानी है. इसकी बनावट और डिजाइन दिल्ली के जामा मस्जिद से मिलती-जुलती है. लोगों का मानना है कि जिस मसाले से जामा मस्जिद का निर्माण हुआ है इस मसाले से गोंडा के जामा मस्जिद का भी निर्माण हुआ है. यह भी माना जाता है कि गोंडा जिले की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी मस्जिद जामा मस्जिद है. इस मस्जिद का निर्माण हुआ था तो लगभग 15 से 20 किलोमीटर दूरी पर कोई मस्जिद नहीं था. सारे मुस्लिम धर्म के लोग यहां पर आकर नमाज अदा करते थे और शुक्रवार को जिस दिन जुम्मा का दिन माना जाता है और मुस्लिम धर्म में यह दिन काफी पवित्र भी माना जाता है उस दिन यहां पर काफी संख्या में मुस्लिम धर्म के लोग आते हैं और नमाज अदा करते हैं. शीश मोहम्मद बताते हैं कि शेख ललक दादा के हम लोग वंशज हैं. हम लोग काफी किस्मत वाले थे कि हमारे पूर्वज ने ऐसी विशाल मस्जिद का गोंडा में निर्माण कराया था.

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