गोंडा जिले के प्रजापतिपुरम का एक परिवार अपने पुश्तैनी मिट्टी के काम से सालाना लाखों रुपये कमा रहा है। आधुनिक मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक चाक की मदद से रोज 1000 से 1500 कुल्हड़ तैयार कर पूरे जिले में सप्लाई किए जा रहे हैं, जिससे परिवार की अच्छी आमदनी हो रही है।
गोंडा जिले के प्रजापतिपुरम का यह परिवार आज अपनी मेहनत और हुनर के दम पर मिसाल बन गया है। कभी साधारण आमदनी पर गुजर-बसर करने वाला यह परिवार अब कुल्हड़ बनाकर सालाना लाखों रुपये कमा रहा है। मनोज प्रजापति ने बताया कि परिवार के सदस्य सुबह से ही मिट्टी तैयार करने में जुट जाते हैं। पहले अच्छी मिट्टी छानी जाती है, फिर उसमें पानी मिलाकर गूंथा जाता है। इसके बाद चाक पर कुल्हड़ का आकार दिया जाता है। धूप में सुखाने के बाद इन्हें भट्ठे में पकाया जाता है। तैयार कुल्हड़ बाजार और चाय दुकानों पर सप्लाई किए जाते हैं।
मनोज प्रजापति ने बताया कि बचपन से ही हम लोग मिट्टी का काम कर रहे हैं, हमारा यह पुश्तैनी काम है और इसको हम लोग अभी भी कर रहे हैं। बीच में मिट्टी का काम बंद हो गया था, तो हम लोग मजदूरी करते थे। फिर धीरे-धीरे मिट्टी का काम बढ़ने लगा और इस समय मिट्टी के कुल्हड़ की बिक्री अच्छी हो रही है। इसके पीछे भी कारण है क्योंकि अब लोग फाइबर और प्लास्टिक छोड़कर मिट्टी के कुल्हड़ का प्रयोग करने लगे हैं। इसी वजह से हम लोग का बिजनेस फिर से चल पड़ा है।
मनोज प्रजापति ने बताया कि पहले हाथ से चाक चलकर कुल्हड़ और दिया तैयार करते थे। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत हम लोग को इलेक्ट्रॉनिक चाक मिला है। उसी से हम अब मिट्टी के कुल्हड़ तैयार करते हैं। इससे समय की बचत होती है और मेहनत भी कम लगती है। साथ ही साथ हम दो ऑटोमेटिक कुल्हड़ बनाने वाली मशीन भी रखे हैं। यह मशीन बिजली से चलती है और इसमें कुल्हड़ बनाना काफी आसान होता है, क्योंकि इसमें कुल्हड़ का सांचा दिया रहता है। उसमें मिट्टी डालकर कुल्हड़ जल्दी समय में तैयार हो जाता है।
मनोज प्रजापति ने बताया कि हमारे यहां एक दिन में लगभग 1000 से डेढ़ हजार कुल्हड़ तैयार किए जाते हैं। वह बताते हैं कि हमारे कुल्हड़ सप्लाई पूरे गोंडा जिले में हो रही है। मनोज प्रजापति ने बताया कि हम लोग अपने हाथ से ही एक साइज का मिट्टी का कुल्हड़ तैयार कर लेते हैं। क्योंकि हम लोगों को पता है कि कितनी मिट्टी उठानी है उतनी ही मिट्टी हाथ से उठाते हैं और उतना ही बड़ा कुल्हड़ तैयार होता है।
मनोज प्रजापति ने बताया कि बचपन से ही हम लोग यही काम करते आ रहे हैं, तो हम लोग को किसी भी सांचे की जरूरत नहीं पड़ती है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के बाद मिट्टी के कुल्हड़ की डिमांड काफी बढ़ गई है। हालांकि बीच में इसका काम बंद ही हो गया था, लेकिन अब फिर से इसका काम शुरू हो गया है और इससे अच्छी इनकम हो रही है। उन्होंने बताया कि हमारे यहां 600 एमएल से लेकर ढाई सौ एमएल तक का मिट्टी का कुल्हड़ तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि जैसे जिनकी डिमांड रहती है उसी प्रकार का कुल्हड़ उनको दिया जाता है।
