चंदौली में शिवलिंग प्रकट होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब मंदिर निर्माण में बदल चुका है। श्री प्रकटेश्वर महादेव मंदिर के लिए विधिवत भूमि पूजन संपन्न हुआ है। संतों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में निर्माण कार्य का शुभारंभ हुआ है। प्रशासन की निगरानी में अब यह स्थल आस्था केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
भूमि पूजन के साथ नए अध्याय की शुरुआत
धपरी स्थित प्राकट्य स्थल पर श्री प्रकटेश्वर महादेव मंदिर निर्माण के लिए विधिवत भूमि पूजन किया गया। कार्यक्रम में हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर भवानीनंदन यति ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कराई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल, जिला सामाजिक सद्भाव प्रमुख बद्री प्रसाद सिंह सहित कई संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कभी धार्मिक और राजनीतिक हलचल का केंद्र
धपरी का यह स्थल एक समय पूरे चंदौली और आसपास के जिलों में चर्चा का विषय बन गया था। खुदाई के दौरान शिवलिंग प्रकट होने की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे। मामला धीरे-धीरे धार्मिक आस्था से जुड़ गया और दो समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन को एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
वार्ता के बाद निकला समाधान
तनावपूर्ण माहौल के बीच स्थानीय स्तर पर कई दौर की वार्ता हुई। प्रशासन ने मध्यस्थता करते हुए दोनों पक्षों से बातचीत की। अंततः सहमति बनी कि स्थल की धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और अब औपचारिक रूप से निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
राणा सिंह ने बताई प्राकट्य की कहानी
भाजपा नेता राणा सिंह ने बताया कि खुदाई के दौरान राजगीर मिस्त्री ने सबसे पहले शिवलिंग और प्रतिमा के प्रकट होने की सूचना दी। इसके बाद स्थानीय लोग और संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। शिवलिंग की संरचना को देखकर लोगों ने उसकी तुलना बाबा बैद्यनाथ धाम के शिवलिंग से की। उनके अनुसार यह अत्यंत प्राचीन और अद्वितीय प्रतीत होता है।
जमीन को लेकर उठे थे सवाल
राणा सिंह ने आरोप लगाया कि जिस जमीन पर शिवलिंग प्रकट हुआ, उस पर कुछ लोग अपने धर्म के अनुसार निर्माण करना चाहते थे। मामला संवेदनशील होते ही प्रशासन सक्रिय हुआ। जिला प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए सभी पक्षों से बातचीत कर समाधान निकाला।
धर्मपुरी के नाम से जानी जाती थी यह जगह
राणा सिंह के अनुसार धपरी क्षेत्र को पहले धर्मपुरी के नाम से जाना जाता था। 84 कोसी परिक्रमा के दौरान साधु-संत यहां विश्राम करते थे। आसपास पहले से देवी-देवताओं के छोटे मंदिर और धार्मिक चिह्न मौजूद हैं। शिवलिंग प्रकट होने के बाद लोगों की आस्था और मजबूत हो गई। हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया।
ट्रस्ट के माध्यम से होगा संचालन
मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट गठित किया जाएगा, जिसमें सभी समाज के लोगों को प्रतिनिधित्व देने की योजना है। राणा सिंह ने कहा कि यह केवल मंदिर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। गर्भगृह, परिक्रमा पथ, सभा मंडप और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
प्रशासन की सतर्क निगरानी जारी
मामले की संवेदनशील पृष्ठभूमि को देखते हुए प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य कानून और व्यवस्था के दायरे में ही किया जाएगा। शांति और सौहार्द बनाए रखना प्राथमिकता है।
आस्था केंद्र बनने की ओर अग्रसर धपरी
जो स्थल कभी विवाद और तनाव का केंद्र बना हुआ था, वह अब धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि लंबे विवाद के बाद समाधान निकल आया है। यदि योजना के अनुसार निर्माण कार्य पूरा होता है, तो श्री प्रकटेश्वर महादेव मंदिर चंदौली का प्रमुख धार्मिक स्थल बन सकता है।

