Lucknow university namaz| Lucknow university mosque: लखनऊ यूनिवर्सिटी (LU) इन दिनों धर्म और सांप्रदायिकता के नाम पर हंगामे का केंद्र बन गई है. पूरा मामला लाल बारादरी नाम की 200 साल पुरानी मुगल-एरा बिल्डिंग में बनी मस्जिद को लेकर है, जहां मुस्लिम स्टूडेंट्स नमाज पढ़ते थे. यूनिवर्सिटी एडमिन ने रेनोवेशन और सेफ्टी के नाम पर बिल्डिंग को बंद कर दिया, जिससे मुस्लिम स्टूडेंट्स नाराज हो गए. फिर हिंदू स्टूडेंट्स की मदद से मुस्लिम स्टूडेंटस ने वहां नमाज अदा की.जिसके बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में पुलिस बल तैनात है और इस मामले में 13 स्टूडेंट्स को नोटिस मिले हैं और कैंपस में तनाव का माहौल है. ये सब रामजान के दौरान हुआ, जिससे विवाद और बढ़ गया.
23 फरवरी को क्या हुआ?
23 फरवरी 2026 को लखनऊ यूनिवर्सिटी कैंपस में लाल बारादरी बिल्डिंग के रेनोवेशन का काम चल रहा था और वहां एक बोर्ड भी लगा हुआ था. परंपरा से मुस्लिम स्टूडेंट्स वहां नमाज पढ़ते थे, लेकिन एडमिन ने ताला लगाकर बैरिकेडिंग कर दी और नमाज पढ़ने से रोका. आरोप है कि ये बिना नोटिस के हुआ. मुस्लिम स्टूडेंट्स ने बाहर सड़क पर नमाज पढ़ने की कोशिश की लेकिन टेंशन बढ़ गया. तभी हिंदू स्टूडेंट्स जिसमें मुख्य रूप से NSUI, समाजवादी छात्र सभा और AISA के स्टूडेंटस ने एकजुटता दिखाई. उन्होंने ह्यूमन चेन बनाकर मुस्लिम स्टूडेंट्स को प्रोटेक्ट किया और नमाज पढ़ने में मदद की.इसका वीडियो वायरल हो गया, जिसे कुछ स्टूडेंट्स ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल दी तो वहीं कुछ हिंदू स्टूडेंट्स इसे देखकर भडक गए.कुछ स्टूडेंटस ने कहा कि यूनिवर्सिटी में सांप्रदायिक माहौल नहीं चलेगा कैंपस में शांति चाहिए. बैरिकेडिंग गिराई गई और शांतिपूर्वक नमाज हुई, लेकिन मामला बढ़ा तो भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई. पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि दिव्यांग कैंटीन के सामने सड़क पर बैठकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन से तनाव व्याप्त हो गया.सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा है और लोक शांति भंग हो सकती है.
अब क्या हुआ: प्रदर्शन जारी, धार्मिक नारे और धरना
24 फरवरी 2026 को भी LU कैंपस में गहमागहमी बनी रही. कुछ स्टूडेंट्स जय श्री राम और अन्य धार्मिक नारे लगाते हुए प्रदर्शन करते दिखे. वे लाल बारादरी के पास पहुंचे, लेकिन पुलिस और एडमिन ने उन्हें रोक लिया. फिर वे काफी देर तक धरने पर बैठे रहे.हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश की.नारेबाजी की और प्रॉक्टर ऑफिस के बाहर धरने पर बैठ गए. ये प्रदर्शन नमाज विवाद के विरोध में था जहां कुछ स्टूडेंट्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी पढने की जगह है यहां धार्मिक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए. दूसरी तरफ मुस्लिम और उनके समर्थक स्टूडेंट्स का कहना है कि ये भेदभाव है. पुलिस की मौजूदगी से कोई बड़ा हंगामा नहीं हुआ लेकिन कैंपस में टेंशन बरकरार है. स्टूडेंट्स ने कहा कि वे सभी शांति चाहते हैं.
यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस का एक्शन:13 स्टूडेंट्स को नोटिस
विवाद बढ़ने पर लखनऊ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया. हसनगंज थाना पुलिस की चालान रिपोर्ट के आधार पर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के सहायक पुलिस आयुक्त ने 13 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया. ये नोटिस धारा-130 BNSS के अंतर्गत है. रिपोर्ट में कहा गया कि छात्रों ने लाल बारादरी में निर्माण कार्य को बाधित करने का प्रयास किया जिससे परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी और भविष्य में शांति भंग होने की आशंका है. पुलिस रिपोर्ट हसनगंज प्रभारी निरीक्षक द्वारा उप-निरीक्षक अश्वनी कुमार मिश्रा की रिपोर्ट पर आधारित है. छात्रों के खिलाफ धारा-126/135 BNSS के तहत मामला दर्ज किया गया. एडमिन का मानना है कि इन गतिविधियों से विश्वविद्यालय की शांति भंग होने की प्रबल संभावना है.
क्या हैं नोटिस की शर्तें: 50,000 रुपये का बॉन्ड और कोर्ट में पेशी
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी 13 छात्रों को 50,000 रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें जमा करने का निर्देश दिया गया है. ये पाबंदी अगले एक वर्ष तक शांति बनाए रखने की गारंटी के रूप में लागू की गई है. छात्रों से पूछा गया है कि उनसे एक वर्ष तक शांति बनाए रखने के लिए 50,000 रुपये का व्यक्तिगत बंधनामा और उतनी ही धनराशि की दो-दो प्रतिभूतियां क्यों न ली जाएं. ये वित्तीय गारंटी भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मांगी गई है. कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने पुलिस रिपोर्ट से संतुष्ट होकर छात्रों को 24 फरवरी 2026 को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है. नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि छात्र शांति बनाए रखने की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं. ये आदेश 23 फरवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर जारी किया गया था.
क्यों बढ़ा विवाद ?
विवाद की जड़ ये है कि लाल बारादरी ASI-प्रोटेक्टेड मोन्यूमेंट है जहां मस्जिद है और मुस्लिम स्टूडेंट्स रामजान में नमाज पढ़ते थे. एडमिन ने स्ट्रक्चरल सेफ्टी और रिपेयर के नाम पर बंद किया, लेकिन स्टूडेंट्स कहते हैं ये बिना नोटिस के था और डिस्क्रिमिनेटरी है. मुस्लिम स्टूडेंट्स को रोका गया, तो हिंदू स्टूडेंट्स ने बैरिकेडिंग गिराकर मदद की और ह्यूमन चेन बनाई. ये गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी, लेकिन दूसरी तरफ कुछ ग्रुप्स ने इसका विरोध किया.उनका कहना है कि कैंपस में धार्मिक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए. पुलिस रिपोर्ट में सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढ़ने के प्रयास, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन का उल्लेख है जो छात्रों के बीच तनाव पैदा कर रहा है. अब कैंपस में भारी पुलिस फोर्स तैनात है और स्टूडेंट्स का कहना है कि वे सभी परिसर में शांति चाहते हैं लेकिन एडमिन का फैसला गलत है. ये सब रामजान के दौरान हुआ जिससे सांप्रदायिक टेंशन और बढ़ गई.
क्या आगे होगा: स्टूडेंट्स और एडमिन की जंग
अभी LU में पुलिस की सख्ती है और 13 स्टूडेंट्स को कोर्ट में पेश होना है. एडमिन सेफ्टी और लॉ एंड ऑर्डर का हवाला दे रहा है जबकि स्टूडेंट्स इसे धार्मिक स्वतंत्रता का इश्यू बता रहे हैं. वीडियोज और सोशल मीडिया पर ये मिसाल के रूप में वायरल हो रहा है, लेकिन कुछ ग्रुप्स धार्मिक नारे लगाकर माहौल गर्मा रहे हैं.

