जननी शिशु सुरक्षा योजना देश की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है, जिसका मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है. इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में सामान्य प्रसव और सिजेरियन प्रसव दोनों पूरी तरह निशुल्क कराए जाते हैं. प्रसव से जुड़ी सभी जांचें, दवाइयां, ब्लड की व्यवस्था और ऑपरेशन की सुविधा बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाती है. अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भोजन की भी व्यवस्था सरकार की ओर से की जाती है, जिससे परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ न पड़े.
जननी शिशु सुरक्षा योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू मुफ्त एम्बुलेंस सेवा है. गर्भवती महिला को घर से अस्पताल तक और अस्पताल से घर तक लाने-ले जाने की सुविधा निशुल्क दी जाती है. यदि किसी कारणवश मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किया जाता है, तो उस स्थिति में भी मुफ्त परिवहन उपलब्ध कराया जाता है. इससे आपातकालीन स्थिति में समय पर उपचार सुनिश्चित होता है.
यह योजना केवल मां तक सीमित नहीं है, जन्म के बाद 30 दिन तक नवजात शिशु को भी मुफ्त इलाज, दवाएं और आवश्यक जांच की सुविधा मिलती है. यदि बच्चे को विशेष देखभाल या उपचार की जरूरत हो, तो वह भी सरकारी अस्पताल में बिना किसी खर्च के उपलब्ध कराया जाता है. योजना का लाभ लेने के लिए गर्भवती महिला को अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल, सीएचसी या पीएचसी में पंजीकरण कराना होता है. आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर महिलाओं को योजना की जानकारी देती हैं और संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करती हैं.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस योजना के माध्यम से संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. जननी शिशु सुरक्षा योजना सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में सरकार का एक अहम और प्रभावी कदम साबित हो रही है.

