कन्नौज की इत्र नगरी फिर चर्चा में है. इत्र व्यापारी निशीष तिवारी द्वारा तैयार किया गया कुवैती ऊद अपने स्मोकी और लकड़ी जैसी गहरी खुशबू के कारण युवाओं और विदेशों में खास लोकप्रिय हो रहा है. इसकी भीनी-भीनी महक लंबे समय तक बनी रहती है और इसकी कीमत 1.2 लाख रुपये प्रति किलो से शुरू होती है. पारंपरिक तरीके से तैयार यह इत्र कन्नौज की खुशबू को वैश्विक बाजार में एक बार फिर पहचान दिला रहा है. ख़बरें फटाफटकन्नौज. जिसे इत्र नगरी के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर अपनी खास खुशबू के कारण चर्चा में है. यहां के इत्र उद्योग में कई ऐसी सुगंधें तैयार होती हैं, जो अपने नाम से ही पहचानी जाती हैं. इनमें एक प्रमुख नाम है ऊद का इत्र, जिसकी मांग न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी जबरदस्त है. हाल ही में इत्र व्यापारी निशीष तिवारी द्वारा तैयार किया गया कुवैती ऊद खासा लोकप्रिय हो रहा है. इसकी स्मोकी और लकड़ी जैसी गहरी खुशबू लोगों को आकर्षित कर रही है.
कुवैती ऊद की खासियत
कुवैती ऊद की खुशबू अपने आप में बेहद खास मानी जाती है, इसकी भीनी-भीनी महक आसपास के वातावरण में तेजी से फैल जाती है और लंबे समय तक बनी रहती है. यही विशेषता इसे आम इत्रों से अलग बनाती है, जानकार बताते हैं कि ऊद की खुशबू शाही और रॉयल एहसास देती है, इसलिए खास मौकों और समारोहों में इसकी मांग अधिक रहती है. कीमत की बात करें तो, कुवैती ऊद इत्र की शुरुआती कीमत लगभग 1,20,000 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है. ऊद एक महंगी और दुर्लभ सुगंधित लकड़ी से तैयार किया जाता है, जिसके कारण इसकी लागत भी अधिक होती है. यह इत्र युवाओं में खास लोकप्रिय हो रहा है, इसकी खुशबू और लॉन्ग लास्टिंग होने के कारण इसे ज्यादा पसंद किया जाता है. पूरी तरह नेचुरल तरीके से तैयार होने वाला यह इत्र गुणवत्ता में भी सर्वोत्तम है.
इत्र व्यापारी का कहना
इत्र व्यापारी निशीष तिवारी के अनुसार, ग्राहक इस खुशबू को नाम से मांगते हैं और एक बार प्रयोग करने के बाद दोबारा इसकी खरीदारी जरूर करते हैं. भारत के महानगरों के साथ-साथ खाड़ी देशों और अन्य विदेशी बाजारों में भी इसकी अच्छी खपत है. कन्नौज के इत्र उद्योग के लिए यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया यह इत्र एक बार फिर साबित कर रहा है कि कन्नौज की खुशबू आज भी वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है.

