रायबरेली के हरचंदपुर क्षेत्र में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले एक साधारण कारीगर को केंद्रीय जीएसटी विभाग से एक करोड़ 25297 रुपए का नोटिस मिला है. मोहम्मद शहीद का कहना है कि उनके पैन कार्ड का दुरुपयोग कर बिहार में फर्जी फर्म बनाई गई है. भारी भरकम नोटिस से पूरा परिवार दहशत में है और न्याय की मांग कर रहा है.
रायबरेली जिले के हरचंदपुर क्षेत्र के रघुवीरगंज बाजार निवासी मोहम्मद शहीद मिट्टी के बर्तन बनाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. वह पढ़े-लिखे नहीं हैं और झुग्गी झोपड़ी में रहकर गुजर बसर करते हैं. ऐसे में जब उन्हें डाक विभाग के जरिए बिहार सीजीएसटी विभाग से भारी रकम का नोटिस मिला, तो पूरा परिवार सहम गया. नोटिस में इनपुट क्रेडिट लेने का उल्लेख है, जिसे समझने में भी उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ी.
मोहम्मद शहीद का कहना है कि करीब पांच वर्ष पहले उन्होंने घोड़ा बग्गी खरीदने के लिए बैंक से कर्ज दिलाने के उद्देश्य से गांव के ही एक व्यक्ति से संपर्क किया था. उसी दौरान उनका पैन कार्ड बनवाया गया. हालांकि उन्हें कर्ज नहीं मिला और न ही घोड़ा बग्गी खरीद सके. उनका आरोप है कि उसी व्यक्ति ने उनके पैन कार्ड का दुरुपयोग कर बिहार में फर्जी फर्म बना दी. जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल फर्म में किया गया, वह नंबर उन्होंने कभी उपयोग नहीं किया.
मोहम्मद शहीद का दावा है कि वह कभी पटना या बिहार नहीं गए. इसके बावजूद उनके नाम से बिहार में फर्म पंजीकृत होने और जीएसटी लेनदेन का मामला सामने आना उन्हें हैरान कर रहा है. उनका कहना है कि बिना जानकारी और सहमति के उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की गई है.
मोहम्मद शहीद के अनुसार सितंबर 2025 में पहली बार पटना से नोटिस मिला था, जिसे उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन 15 फरवरी को वैशाली डिवीजन से दोबारा नोटिस मिलने के बाद मामला स्पष्ट हुआ. जब उन्हें पता चला कि एक करोड़ पच्चीस हजार 297 रुपए की इनपुट क्रेडिट का नोटिस जारी हुआ है, तो परिवार के होश उड़ गए.
मोहम्मद शहीद के पास न खुद का पक्का मकान है और न ही खेती के लिए जमीन. उनकी आय का एकमात्र साधन मिट्टी के बर्तन हैं, जिन्हें बनाकर वह गांव-गांव और मेलों में बेचते हैं. ऐसे में करोड़ों के नोटिस ने पूरे परिवार को चिंता में डाल दिया है.
पीड़ित कारीगर ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है. उनका कहना है कि यदि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग हुआ है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. यह मामला न केवल एक व्यक्ति की परेशानी है, बल्कि दस्तावेजों के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी की गंभीरता को भी उजागर करता है.

