Uttar Pradesh

रात को सोते समय बच्चों के पैरों में हो रहा दर्द, तो हो जाएं सावधान, वरना बढ़ सकता है खतरा – उत्तर प्रदेश समाचार

ग्रेटर नोएडा में बच्चों में बढ़ता हुआ दर्द का मुद्दा

आजकल कई माता-पिता अपने बच्चों से एक आम शिकायत बार-बार सुन रहे हैं – “मम्मी, पैर दबा दीजिए… दर्द हो रहा है।” दिनभर खेलकूद और गतिविधियों में व्यस्त रहने वाले बच्चे रात होते-होते पैरों, पीठ या कंधों में दर्द की शिकायत करते हैं। अक्सर इसे सामान्य “ग्रोइंग पेन” मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह हड्डियों में पोषण की कमी का संकेत भी हो सकता है।

बदलती लाइफस्टाइल और विटामिन D की कमी

सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. भरत गोस्वामी बताते हैं कि पिछले कुछ समय में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बैक पेन, शोल्डर पेन और एल्बो पेन के मामले तेजी से बढ़े हैं। उनके अनुसार इसकी प्रमुख वजह बदलती जीवनशैली, असंतुलित आहार और विटामिन D की कमी है। विटामिन D हड्डियों की ग्रोथ और मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, जिससे कम उम्र में ही दर्द की समस्या शुरू हो जाती है।

इम्यूनिटी कमजोर तो बढ़ सकता है खतरा

डॉ. गोस्वामी के अनुसार बच्चों की इम्यूनिटी वयस्कों की तुलना में स्वाभाविक रूप से कम होती है। यदि हड्डियों में संक्रमण हो जाए और समय पर इलाज न मिले, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए माता-पिता को बच्चों की बार-बार होने वाली दर्द की शिकायत को हल्के में नहीं लेना चाहिए। वे सलाह देते हैं कि केवल समस्या बढ़ने पर ही नहीं, बल्कि नियमित जांच के माध्यम से भी इन स्थितियों की रोकथाम की जा सकती है।

धूप की कमी भी बड़ी वजह

Fortis Hospital के डॉ. कुशाग्र गुप्ता भी इस समस्या को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि कई बच्चे रात में पैरों में दर्द की शिकायत करते हैं, जो अक्सर कैल्शियम और विटामिन D की कमी का संकेत होता है। भारत में विटामिन D की कमी का जोखिम अधिक है। ब्राउन स्किन टोन के कारण शरीर को पर्याप्त विटामिन D बनाने के लिए ज्यादा धूप की जरूरत होती है। पहले बच्चे खुले मैदानों में खेलते थे, लेकिन अब मोबाइल, पढ़ाई का दबाव और इनडोर गतिविधियों के कारण धूप में समय बिताना कम हो गया है। दोपहर की धूप विटामिन D का प्रमुख स्रोत मानी जाती है।

संतुलित आहार है जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल धूप ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार भी बेहद आवश्यक है। दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद कैल्शियम के प्रमुख स्रोत हैं। डॉ. गोस्वामी के अनुसार दूध से मिलने वाले कैल्शियम का सीधा विकल्प नहीं है। बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित रूप से दूध और पोषक आहार का सेवन जरूरी है।

यदि आहार और धूप से पर्याप्त पोषण न मिल पाए, तो डॉक्टर की सलाह से विटामिन D और कैल्शियम सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए।

कब सतर्क हों माता-पिता?

यदि बच्चा बार-बार दर्द की शिकायत करे, जल्दी थक जाए या रात में दर्द बढ़ जाए, तो इसे सामान्य समझकर टालना नहीं चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से न केवल मौजूदा दर्द से राहत मिलती है, बल्कि भविष्य में गंभीर हड्डी संबंधी समस्याओं से भी बचाव संभव है।

रात का पैरों का दर्द एक छोटी शिकायत लग सकती है, लेकिन यह बच्चों की हड्डियों से जुड़ी बड़ी चेतावनी भी हो सकती है। जागरूकता, संतुलित आहार, पर्याप्त धूप और नियमित डॉक्टर परामर्श से बच्चों को स्वस्थ और मजबूत भविष्य दिया जा सकता है।

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