अरहर की खेती के लिए ये समय सबसे महत्वपूर्ण है. जब फसल में दाना भरने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो सही पोषण और देखभाल ही पैदावार का भविष्य तय करती है. किसान बेहतर प्रबंधन और उर्वरकों के सही छिड़काव से न केवल दानों का वजन और चमक बढ़ा सकते हैं, बल्कि प्रति एकड़ रिकॉर्ड उत्पादन भी ले सकते हैं.
दानों में चमक और वजन बढ़ाने के लिए पोटाश और सल्फर की भूमिका अहम है. पोटाश दानों के आकार को सुडौल बनाता है और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. वहीं, सल्फर दानों में प्रोटीन की मात्रा और तेल की गुणवत्ता में सुधार करता है. यदि बुवाई के समय इनका प्रयोग नहीं किया गया है, तो इस अवस्था में तरल उर्वरकों का प्रयोग करना काफी लाभदायक सिद्ध होता है.
दाना बनते समय खेत में नमी का होना जरूरी है. यदि इस दौरान मिट्टी में दरारें पड़ने लगें या नमी कम हो जाए, तो दानों का विकास रुक जाता है और वे पिचके हुए रह जाते हैं. किसान ध्यान रखें कि खेत में जलभराव न हो, लेकिन हल्की सिंचाई जरूर करें. पर्याप्त नमी रहने से पोषक तत्व जड़ों से दानों तक आसानी से पहुंच पाते हैं.
जब फलियों में दाना बनना शुरू हो, तब NPK 0:52:34 का 1 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. इसमें मौजूद फास्फोरस दानों की मजबूती और पोटेशियम उनकी चमक बढ़ाता है. यह स्प्रे दानों के भराव को एकसमान बनाता है, जिससे उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक की ग्रोथ देखी जा सकती है.
अरहर के दानों को चमकदार और फटने से बचाने के लिए बोरॉन (20%) का प्रयोग करें. 250 ग्राम बोरॉन को प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करने से परागण की प्रक्रिया बेहतर होती है और फलियों के अंदर दाने पूरे वजन के साथ बनते हैं. बोरॉन दानों की सतह को चिकना और आकर्षक बनाता है, जिससे बाजार में किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं.
इस अवस्था में फली छेदक कीट सबसे बड़ा दुश्मन होता है. यदि इल्लियां दानों को खा जाती हैं, तो पूरी मेहनत बेकार हो सकती है. कीटों के बचाव के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट या स्पिनोसैड जैसे प्रभावी कीटनाशकों का प्रयोग करें. समय पर कीट नियंत्रण करने से न केवल दानों की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है, बल्कि उत्पादन में गिरावट भी नहीं आती.
अगर आप रसायनों के साथ जैविक विकल्प भी चाहते हैं, तो समुद्री शैवाल अर्क या अमीनो एसिड आधारित टॉनिक का छिड़काव कर सकते हैं. ये पौधे के मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं, जिससे पौधा उपलब्ध खाद-पानी का बेहतर इस्तेमाल कर पाता है. इससे दानों का वजन बढ़ता है और फसल लंबे समय तक हरी-भरी बनी रहती है, जिससे दाना मजबूत होता है.
अधिक उत्पादन के लिए सही समय पर कटाई भी जरूरी है. जब 80 प्रतिशत फलियां पककर भूरी हो जाएं, तभी कटाई करें. दानों में चमक बनाए रखने के लिए फसल को खलिहान में अच्छी तरह सुखाएं लेकिन ध्यान रहे कि सीधे बहुत तेज धूप में लंबे समय तक रखने से रंग फीका पड़ सकता है. सही भंडारण ही आपकी फसल की चमक और वजन को बाजार तक सुरक्षित रखता है.

