गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपना पक्ष रखा, कहा- शब्दों की चूक से भ्रम की स्थिति बनी
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपना पक्ष रखा है और पूरे मामले को शब्दों की चूक बताया है. विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने कहा है कि विश्वविद्यालय दुनिया के अलग-अलग देशों से उन्नत उपकरण और तकनीकें मंगा रहा है, ताकि छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त करें.
उन्होंने कहा कि अगर छात्रों को वैश्विक स्तर की तकनीकों का एक्सपोजर मिलेगा, तो वे भविष्य में बेहतर नवाचार कर सकेंगे और देश के विकास में योगदान देंगे. उन्होंने कहा कि हमारी मंशा पूरी तरह शैक्षणिक और शोध से जुड़ी थी. शब्दों के चयन की त्रुटि से भ्रम की स्थिति बनी. ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी हाल ही में एक बयान को लेकर विवादों में आ गई.
विश्वविद्यालय के एक फैकल्टी सदस्य की ओर से शब्दों के चयन में हुई चूक के कारण स्थिति विवादित बनी, जिसके बाद संस्थान की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया. रजिस्ट्रार नितिन गौर ने कहा है कि विश्वविद्यालय इस घटना पर खेद व्यक्त करता है और स्पष्ट करता है कि उसकी मंशा पूरी तरह शैक्षणिक और शोध से जुड़ी थी.
दिल्ली में आयोजित एक एआई समिट के दौरान विश्वविद्यालय के ‘ओरायन’ प्रोजेक्ट को लेकर भी सवाल उठे. समिट में प्रस्तुति के दौरान किए गए कुछ दावों और तकनीकी विवरणों को लेकर चर्चा हुई, जिसके बाद सोशल मीडिया और शैक्षणिक हलकों में इसे लेकर आलोचना सामने आई.
कुछ विशेषज्ञों ने यह जानना चाहा कि प्रस्तुत तकनीक पूरी तरह स्वदेशी विकास है या अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से प्राप्त तकनीक का शैक्षणिक उपयोग. इस घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी असहज स्थिति बनी, जिसे विश्वविद्यालय ने गंभीरता से लिया है.
क्यों हुआ ऐसा
लोकल 18 से बात करते हुए रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि ‘ओरायन’ सहित अन्य तकनीकी संसाधनों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों के लिए लाया गया है. उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को विश्व स्तर पर विकसित हो रही तकनीकों से अवगत कराना है, ताकि वे उन्हें समझ सकें, उनका विश्लेषण कर सकें और अपनी नवाचार क्षमता जोड़कर उन्हें और बेहतर बना सकें.
उन्होंने दोहराया कि प्रस्तुति में शब्दों के चयन की त्रुटि से भ्रम की स्थिति बनी, लेकिन इरादा गलत नहीं था. विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ब्लॉक का निर्माण किया गया है, जो अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा. इस एआई ब्लॉक के लिए लगभग 350 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है. इस बजट के अंतर्गत विभिन्न विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं, जिनमें मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन से जुड़ी लैब शामिल होंगी.
सावधानी बरतने का वादा
रजिस्ट्रार ने विकास (डेवलपमेंट) और स्वयं विकसित करने (डेवलप) के बीच अंतर पर भी जोर दिया. उनके अनुसार, किसी तकनीक का अध्ययन, अनुकूलन और शोध के उद्देश्य से उपयोग करना शैक्षणिक प्रक्रिया का हिस्सा है. विश्वविद्यालय का लक्ष्य तकनीकी उत्कृष्टता हासिल करना है, न कि किसी प्रकार की भ्रामक छवि प्रस्तुत करना. रजिस्ट्रार ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में संचार और प्रस्तुति के स्तर पर और अधिक सावधानी बरती जाएगी. संस्थान ने दोहराया कि उसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्रेरित करना, उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देना और अत्याधुनिक शोध सुविधाएं उपलब्ध कराना है.

