तुलसी: एक प्राकृतिक देसी टॉनिक जो सेहत का खजाना है
भारतीय घरों के आंगन या गमलों में सजी तुलसी केवल आस्था का प्रतीक भर नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. आयुर्वेद में इसे “औषधियों की रानी” कहा गया है, क्योंकि इसके पत्तों में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सर्दी-खांसी से लेकर बुखार, पाचन समस्या और मानसिक तनाव तक में राहत दिलाने में मददगार माने जाते हैं. सदियों पुरानी परंपरा में शामिल यह पौधा आज भी प्राकृतिक उपचार का भरोसेमंद सहारा बना हुआ है. अनगिनत खासियत के चलते तुलसी को एक प्राकृतिक देसी टॉनिक माना जाता है.
सर्दी-खांसी और जुकाम में तुलसी बेहद असरदार मानी जाती है. तुलसी की 5-7 पत्तियों को अदरक और काली मिर्च के साथ उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से गले की खराश, खांसी और नाक बंद होने में राहत मिलती है. बलिया की फेमस आयुर्वेदाचार्य डॉ वंदना तिवारी के मुताबिक, तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं. मौसम बदलने पर नियमित रूप से तुलसी की चाय पीना फायदेमंद माना जाता है. तनाव और थकान को कम करने में भी तुलसी कारगर है. आयुर्वेद के अनुसार, तुलसी एक एडाप्टोजेनिक जड़ी-बूटी है, जो शरीर को तनाव से लड़ने की क्षमता देती है. तुलसी की पत्तियों का सेवन करने या इसकी चाय पीने से मानसिक शांति मिलती है और चिंता कम होती है.
कई लोग दिनभर की थकान दूर करने के लिए तुलसी-अदरक की चाय का सेवन करते हैं. पाचन तंत्र के लिए भी तुलसी लाभकारी है. गैस, अपच या पेट दर्द की स्थिति में तुलसी की पत्तियां चबाने से राहत मिल सकती है. यह पेट की सूजन कम करने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है. त्वचा रोग और मुंह के स्वास्थ्य में भी तुलसी उपयोगी है. इसके एंटीसेप्टिक गुण मुंह के छाले और सांस की दुर्गंध को कम करने में मदद करते हैं. तुलसी के पत्तों का रस त्वचा पर लगाने से मुंहासों में राहत मिल सकती है.
हालांकि डॉ. वंदना के अनुसार, तुलसी का उपयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. गर्भवती महिलाओं या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. सही तरीके से उपयोग करने पर तुलसी सचमुच एक प्राकृतिक देसी टॉनिक साबित हो सकती है.

