Uttar Pradesh

वृंदावन के गोपेश्वर महादेव मंदिर | जब भगवान शिव गोपी बनकर महारास लीला में शामिल हुए |

गोपेश्वर महादेव मंदिर: भगवान शिव का गोपी अवतार

भगवान शिव को लीलाधर यानि भगवान श्रीकृष्ण प्रिय हैं और इसी प्रेम के अधीन महादेव एक बार गोपी भी बन गए थे. इस बात का प्रमाण कृष्ण नगरी वृंदावन में स्थित प्राचीन शिव मंदिर में मिलता है, जहां विश्व के नाथ महादेव गोपी के रूप में विराजमान हैं. वृंदावन, जहां हर कण में श्रीकृष्ण की लीला बसी है, वहां एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहां देवाधिदेव महादेव स्वयं गोपी बनकर विराजमान हैं. इसे गोपेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है, जहां बिंदी, सिंदूर, चूड़ी आदि से श्रृंगार होता है. आइए जानते हैं कि भगवान शिव ने गोपी अवतार क्यों धारण किया?

गोपेश्वर महादेव मंदिर भक्ति, प्रेम और समर्पण का अनोखा प्रतीक है. उत्तर प्रदेश सरकार के कल्चरल डिपार्टमेंट के अनुसार, यह मंदिर उस दिव्य क्षण का साक्षी है जब भगवान शिव ने श्रीकृष्ण की महारास लीला में शामिल होने के लिए गोपी रूप धारण किया.

भगवान शिव ने लिया गोपी अवतार

किंवदंतियों के अनुसार, श्रीकृष्ण शरद पूर्णिमा की रात राधा रानी और गोपियों के साथ रास रचाते थे. भगवान शिव इस रास के आनंद में शामिल होना चाहते थे, लेकिन पुरुष रूप में प्रवेश की अनुमति नहीं थी. वृंदा देवी ने उन्हें रोक दिया. तब झिझक को त्यागकर महादेव भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की भक्ति में लीन हो गए.

उन्होंने पवित्र यमुना में स्नान किया और एक सुंदर गोपी के रूप में प्रकट हुए. श्री कृष्ण उनके इस सखी भाव को पहचान लिए और प्रसन्न होकर उन्हें ‘गोपेश्वर’ नाम दिया. उसी दिव्य लीला के स्मरण में आज गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग गोपी स्वरूप में पूजे जाते हैं.

गोपी भाव में होता है मंदिर का श्रृंगार

मंदिर का श्रृंगार गोपी भाव में किया जाता है, जिसमें बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, फूलों की माला और घाघरा-चोली समेत सोलह श्रृंगार के सामान दिखते हैं. यह दृश्य भक्तों को अलौकिक अनुभूति देता है और मन को शांति, हृदय को प्रेम तथा आत्मा को वैराग्य प्रदान करता है.

पुरुष-स्त्री शक्ति के मिलन का प्रतीक है मंदिर

गोपेश्वर नाथ मंदिर यमुना नदी के किनारे वंशी वट के पास स्थित है. यह वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है. कथा के अनुसार, इस शिवलिंग की स्थापना भगवान कृष्ण के वंशज व्रजनाभ ने की थी. यहां पूजा करने वाली गोपियां ब्रज भूमि में कृष्ण को पति रूप में पाने की कामना करती थीं. मंदिर प्रकृति की पुरुष और स्त्री शक्ति के मिलन का भी प्रतीक माना जाता है.

शरद पूर्णिमा पर विशेष आयोजन

कल्चरल डिपार्टमेंट के अनुसार, गोपेश्वर महादेव मंदिर केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि प्रेम की अनुभूति का केंद्र है. यहां का शांत वातावरण, प्राचीन स्थापत्य कला और प्रवाहित होने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा सीधे हृदय से संवाद करती है. यहां आकर श्रद्धालु वृंदावन के रस में विलीन हो जाते हैं. शरद पूर्णिमा पर गोपेश्वरनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं.

गोपेश्वर महादेव मंदिर कैसे पहुंचे?

गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन में स्थित है, जो मथुरा से करीब 12 किलोमीटर दूर है. यहां पहुंचने के लिए मथुरा-वृंदावन की प्रमुख कार रेंटल कंपनियों से निजी टैक्सी या ऑटो रिक्शा आसानी से लिया जा सकता है. निकटतम एयरपोर्ट दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट लगभग 164 किमी और सबसे पास रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है, जो 13 किमी दूर है.

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