उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बांस की खेती को अपनाकर अपनी किस्मत बदल रहे हैं. कम लागत, कम पानी और सालों तक लगातार उत्पादन देने वाली यह खेती किसानों के लिए ‘हरा सोना’ साबित हो रही है. खीरी के किसान यदुनंदन सिंह ने आंधी-तूफान के जोखिम वाली केले की खेती को छोड़कर बांस को चुना और अब वे इससे बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. जानिए कैसे बंजर जमीन पर भी यह खेती किसानों की आय को कई गुना बढ़ा रही है.
लखीमपुर खीरी जिले में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ बांस की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. कम लागत और लंबे समय तक होने वाले उत्पादन की वजह से बांस की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. बाजार में बांस की मांग जिस तरह बढ़ रही है, उससे किसानों को इसके दाम भी काफी अच्छे मिल रहे हैं.
बांस की खेती मुनाफे का सौदा इसलिए भी है क्योंकि इसका इस्तेमाल कई उद्योगों में कच्चे माल के तौर पर होता है. निर्माण कार्यों में पाड़ और सीढ़ियां बनाने के अलावा, बांस का सबसे ज्यादा उपयोग अगरबत्ती उद्योग में इसकी तीलियों के लिए किया जाता है. इसके साथ ही आधुनिक समय में बांस से बने इको-फ्रेंडली फर्नीचर, सजावटी सामान, टोकरी और कागज बनाने वाली मिलों में इसकी जबरदस्त मांग है. कपड़े के रेशे और खान-पान में बांस के अचार व मुरब्बे का चलन बढ़ने से भी किसानों को लोकल मार्केट से लेकर फैक्ट्रियों तक आसानी से ग्राहक मिल रहे हैं. यही कारण है कि यह खेती आय का एक ठोस जरिया बन गई है.
खीरी के रहने वाले किसान यदुनंदन सिंह ने लोकल 18 को बताया कि पहले वे केले की खेती करते थे. केले में मुनाफा तो था, लेकिन आंधी और तूफान के कारण फसल पूरी तरह बर्बाद होने का डर बना रहता था. इसके विपरीत, बांस की फसल पर मौसम के उतार-चढ़ाव का कोई खास असर नहीं पड़ता. यदुनंदन करीब तीन बीघे में बांस की खेती कर रहे हैं और अन्य किसानों को भी जागरूक कर रहे हैं. उनके अनुसार, बांस में रोगों का प्रकोप भी न के बराबर रहता है.
सही समय पर बांस की रोपाई से फायदा यदुनंदन सिंह के मुताबिक, बांस की पौध लगाने के करीब 4 साल बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसकी रोपाई के लिए जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इस दौरान नमी और पोषण मिलने से पौधों की ग्रोथ अच्छी होती. बाजार में एक बांस की कीमत गुणवत्ता के आधार पर ₹100 से लेकर ₹200 तक आसानी से मिल जाती है. कम निवेश में सुरक्षित और बड़ी कमाई के लिए अब खीरी के किसान बांस को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं.

