उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड रुपईडीहा ग्राम सभा इटहिया नबीजोत में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर आज भी लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर वर्षों पुराना बताया जाता है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. खासकर सावन और महाशिवरात्रि के समय यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है.
दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर के महंत शिव नाथ शुक्ला बताते हैं कि दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर का निर्माण कमलेश्वर भारती के पूर्वज ने कराया था. माना जाता है कि यह मंदिर लगभग ढाई सौ से तीन सौ वर्ष पुराना है. उन्होंने बताया कि इस मंदिर के अंदर सफेद पत्थर का शिवलिंग स्थापित किया गया है इसीलिए इस मंदिर का नाम दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर पड़ा है. उन्होंने बताया कि हमारी पांचवीं पीढ़ी है जो यहां पर पूजा पाठ करती आ रही है. हमसे पहले हमारे पूर्वज इस मंदिर पर पूजा पाठ किया करते थे और हम उनके पांचवीं पीढ़ी हैं जो इस मंदिर पर आज भी पूजा पाठ कर रहे हैं.
इस गांव में कमलेश्वर भारती के पूर्वज जो कि जमींदार थे उन्होंने इस मंदिर का निर्माण किया था. उन्हीं के नेतृत्व में इसका देखभाल भी किया जाता था. फिर धीरे-धीरे जिम्मेदारी की प्रथा खत्म हुई तो इस मंदिर का देखभाल गांव के लोग करने लगे. आज भी इस मंदिर का देखभाल गांव पर मिलकर किया जाता है और चंदा लगाकर इस मंदिर का मरम्मत भी किया जाता है.
शिवनाथ शुक्ला बताते हैं कि दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर पर प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार के अलावा सावन मास, मलमास, शिवरात्रि कजरी तीज के अलावा जितने भगवान भोलेनाथ के पर्व होते हैं उसे सारे पर्व पर यहां पर मेले का आयोजन होता है. शिवनाथ शुक्ला बताते हैं कि दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर पर गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच से श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं और भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक करते हैं. शिवनाथ शुक्ला बताते हैं कि हमारे पूरे ग्राम सभा की रक्षा स्वयं भगवान भोलेनाथ करते हैं. माना जाता है कि दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करने से सारी मन्नते पूरी होती है. और इस महादेव मंदिर पर दूध चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है.

